Dr. S. Jaishankar: पश्चिम एशिया में जंग का माहौल लगातार गहराता जा रहा है और इस बीच भारत सरकार वहां फंसे अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए दिन-रात एक कर रही है। सोमवार को राज्यसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर एक अहम बयान दिया। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 67,000 भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके सुरक्षित वापस लौट चुके हैं और बाकी बचे लोगों को भी जल्द से जल्द घर पहुंचाने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। जयशंकर ने यह भी कहा कि इस समय नेतृत्व स्तर पर ईरान से सीधा संपर्क बेहद मुश्किल है लेकिन इसके बावजूद भारतीय दूतावास तेहरान में पूरी तरह चालू है और हाई अलर्ट पर है।
Dr. S. Jaishankar: 67,000 भारतीय सुरक्षित लौटे
राज्यसभा में जयशंकर ने जो आंकड़े पेश किए वे बताते हैं कि भारत सरकार कितनी तेजी से और गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने बताया कि रविवार तक करीब 67,000 भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके सुरक्षित निकल चुके हैं। यह एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि जंग के माहौल में इतने लोगों को सुरक्षित निकालना आसान काम नहीं होता।
इसके अलावा तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने वहां पढ़ाई कर रहे कई भारतीय छात्रों को ईरान से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई है। जो भारतीय व्यापार के सिलसिले में ईरान में थे उन्हें पहले आर्मेनिया भेजा गया और वहां से भारत वापस लाया गया। जयशंकर ने साफ किया कि तेहरान में हमारा दूतावास इस वक्त पूरी तरह काम कर रहा है और वहां मौजूद भारतीय समुदाय की मदद के लिए पूरी तरह तैयार है।
विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि उन्होंने खुद ईरानी विदेश मंत्री से बात की है। हालांकि उन्होंने माना कि इस वक्त नेतृत्व स्तर पर ईरान से संपर्क करना बेहद मुश्किल हो गया है। लेकिन इसके बावजूद भारत ने एक बड़ा मानवीय कदम उठाया। भारत ने ईरानी युद्धपोत लावन को केरल के कोच्चि बंदरगाह पर रुकने की इजाजत दी। इस कदम की ईरान के विदेश मंत्री ने खुले दिल से तारीफ की और भारत का शुक्रिया अदा किया। यह घटना बताती है कि भारत इस मुश्किल दौर में भी अपनी कूटनीतिक समझदारी और मानवीय सोच के साथ काम कर रहा है।
Dr. S. Jaishankar: एक करोड़ भारतीय खाड़ी में, दो व्यापारिक जहाज डूबे
विदेश मंत्री जयशंकर ने संसद में यह भी बताया कि पश्चिम एशिया का यह संघर्ष भारत के लिए सिर्फ वहां फंसे नागरिकों तक सीमित नहीं है बल्कि इसके कई और गहरे असर हैं जो भारत की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को सीधे प्रभावित करते हैं। सबसे पहली बात यह कि खाड़ी देशों में इस वक्त एक करोड़ से ज्यादा भारतीय रहते और काम करते हैं। यह एक बहुत बड़ी संख्या है और इन सभी लोगों की सुरक्षा भारत सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। ईरान में भी कुछ हजार भारतीय पढ़ाई या रोजगार के लिए मौजूद हैं। इन सभी की भलाई के लिए भारत सरकार लगातार नजर रख रही है।
दूसरी बड़ी चिंता यह है कि पश्चिम एशिया भारत की एनर्जी सिक्योरिटी यानी ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। इस क्षेत्र से भारत तेल और गैस का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अगर यहां हालात बिगड़ते रहे तो सप्लाई चेन में गड़बड़ी होगी जिसका सीधा असर भारत में पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की कीमतों पर पड़ सकता है। जयशंकर ने खुद माना कि सप्लाई चेन में गंभीर रुकावट और अस्थिरता का यह माहौल भारत के लिए बड़ी चुनौती है। सबसे दिल दहला देने वाली बात यह है कि जयशंकर ने संसद में बताया कि इस संघर्ष में भारत के दो व्यापारिक जहाज डूब चुके हैं और एक जहाज अभी भी लापता है। यह खबर बताती है कि पश्चिम एशिया में हालात कितने भयावह हो चुके हैं। समुद्री रास्तों पर भी खतरा मंडरा रहा है जो भारत के व्यापार के लिए एक गंभीर समस्या है।
Dr. S. Jaishankar: PM मोदी खुद रख रहे नजर
राज्यसभा में जयशंकर ने एक और बड़ी बात कही जो भारत के स्टैंड को पूरी तरह साफ करती है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों पर लगातार नजर रख रहे हैं। यानी यह मामला सिर्फ विदेश मंत्रालय तक सीमित नहीं है बल्कि सबसे ऊपर से इस पर पैनी नजर रखी जा रही है।
भारत का रुख इस पूरे मामले में एकदम साफ है। जयशंकर ने कहा कि हमारा मानना है कि सभी विवादों और मुद्दों को सुलझाने का एकमात्र रास्ता संवाद और बातचीत है। भारत किसी भी देश के साथ संघर्ष का समर्थन नहीं करता और शांतिपूर्ण हल की वकालत करता है। यह भारत की पुरानी और आजमाई हुई विदेश नीति रही है जो हर मुश्किल दौर में काम आती है।
जयशंकर ने यह भी जोड़ा कि पश्चिम एशिया की स्थिरता भारत के लिए सीधे तौर पर बेहद जरूरी है। हम उस क्षेत्र के पड़ोसी हैं और वहां की अशांति का असर हम पर भी पड़ता है। इसलिए भारत चाहता है कि जल्द से जल्द इस संघर्ष का अंत हो और पूरे क्षेत्र में अमन और चैन की वापसी हो। फिलहाल भारत सरकार की पहली प्राथमिकता वहां फंसे हर भारतीय को सुरक्षित घर वापस लाना है।









