देश की राजनीति में एक बार फिर विपक्षी एकता चर्चा का विषय बन गई है। सोमवार को दिल्ली के संविधान क्लब में INDIA गठबंधन की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, एनसीपी (शरद पवार गुट), शिवसेना (यूबीटी) समेत कई दलों के शीर्ष नेता शामिल हुए। बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee, समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav और कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge समेत कई बड़े चेहरे मौजूद रहे।
हालांकि इस बैठक की सबसे बड़ी चर्चा DMK की गैरमौजूदगी रही। कभी INDIA गठबंधन के महत्वपूर्ण सहयोगियों में शामिल रही DMK ने इस बैठक से दूरी बना ली, जिससे विपक्षी एकता को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
लंबे समय बाद हुई बड़ी बैठक
INDIA गठबंधन की यह बैठक इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि लोकसभा चुनाव 2024 के बाद विपक्षी दलों की यह पहली बड़ी औपचारिक बैठक बताई जा रही है। पिछले काफी समय से गठबंधन के भीतर संवाद कम दिखाई दे रहा था और कई दल अपने-अपने राज्यों की राजनीति में व्यस्त थे। ऐसे में दिल्ली में हुई यह बैठक विपक्षी खेमे के लिए शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखी जा रही है।
बैठक में शामिल नेताओं ने मौजूदा राजनीतिक हालात, आने वाले चुनावों और केंद्र सरकार के खिलाफ साझा रणनीति पर चर्चा की। विपक्षी दलों की कोशिश यह संदेश देने की रही कि मतभेदों के बावजूद वे राष्ट्रीय स्तर पर एक मंच पर आने के लिए तैयार हैं।
राहुल, ममता और अखिलेश की मौजूदगी रही खास
बैठक में सबसे ज्यादा ध्यान राहुल गांधी, ममता बनर्जी और अखिलेश यादव की मौजूदगी पर रहा। हाल के महीनों में विपक्षी राजनीति में इन तीन नेताओं की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है।
ममता बनर्जी का दिल्ली पहुंचना भी खास माना गया क्योंकि कुछ समय पहले तक उनके INDIA गठबंधन को लेकर रुख पर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। लेकिन बैठक में शामिल होकर उन्होंने साफ संकेत दिया कि विपक्षी एकता के प्रयासों से उनकी पार्टी पूरी तरह अलग नहीं हुई है।
वहीं अखिलेश यादव भी बैठक में सक्रिय नजर आए। उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी की भूमिका को देखते हुए गठबंधन में उनकी मौजूदगी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आखिर DMK ने क्यों बनाई दूरी?
बैठक से पहले ही यह साफ हो गया था कि DMK इसमें हिस्सा नहीं लेगी। पार्टी ने कांग्रेस पर तमिलनाडु की राजनीति में विश्वासघात का आरोप लगाया था और इसी वजह से बैठक से दूर रहने का फैसला किया।
रिपोर्ट्स के अनुसार DMK ने अब खुद को INDIA गठबंधन से अलग कर लिया है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में गठबंधन के साथ आगे बढ़ना उनके लिए संभव नहीं है। DMK की गैरमौजूदगी विपक्षी खेमे के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है क्योंकि दक्षिण भारत में यह पार्टी लंबे समय से विपक्ष की प्रमुख ताकत रही है।
गठबंधन के सामने क्या हैं चुनौतियां?
INDIA गठबंधन की सबसे बड़ी चुनौती फिलहाल उसकी आंतरिक एकजुटता मानी जा रही है। कई राज्यों में सहयोगी दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। कुछ राज्यों में कांग्रेस और उसके सहयोगी दल एक-दूसरे के खिलाफ भी चुनाव लड़ते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता दिखाना आसान है, लेकिन राज्यों में सीट बंटवारे और नेतृत्व जैसे मुद्दों पर सहमति बनाना कहीं ज्यादा मुश्किल होता है। यही वजह है कि विपक्षी गठबंधन को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
बैठक का मुख्य एजेंडा क्या रहा?
सूत्रों के मुताबिक बैठक में आगामी चुनावों की रणनीति, महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक मुद्दों और केंद्र सरकार के खिलाफ संयुक्त अभियान जैसे विषयों पर चर्चा हुई। विपक्षी दलों ने संसद और सड़कों पर मिलकर मुद्दे उठाने की संभावनाओं पर भी विचार किया।
इसके अलावा गठबंधन के भीतर समन्वय मजबूत करने और विभिन्न दलों के बीच संवाद बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। कई नेताओं का मानना है कि अगर विपक्ष को भविष्य में मजबूत चुनौती पेश करनी है तो आपसी मतभेदों को कम करना होगा।
23 दलों की मौजूदगी से दिया एकता का संदेश
हालांकि DMK और कुछ अन्य दल बैठक से दूर रहे, लेकिन करीब 23 दलों की मौजूदगी को विपक्ष ने सकारात्मक संकेत के रूप में पेश किया। बैठक में कई क्षेत्रीय दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया और साझा रणनीति बनाने की बात कही। विपक्षी नेताओं का मानना है कि देश की राजनीति में मजबूत लोकतांत्रिक संतुलन बनाए रखने के लिए विपक्ष का संगठित रहना जरूरी है।
बीजेपी भी रख रही है नजर
INDIA गठबंधन की इस बैठक पर बीजेपी की भी करीबी नजर रही। BJP नेताओं ने पहले ही दावा किया था कि विपक्षी गठबंधन अंदरूनी मतभेदों से जूझ रहा है और उसकी एकता सिर्फ दिखावे की है। दूसरी तरफ विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मजबूत विपक्ष की भूमिका जरूरी होती है और इसी उद्देश्य से विभिन्न दल एक साथ आ रहे हैं।
आगे क्या होगा?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बैठक विपक्षी राजनीति के लिए एक नई शुरुआत साबित हो सकती है। हालांकि इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि गठबंधन के सहयोगी दल आने वाले महीनों में कितनी मजबूती से साथ बने रहते हैं। DMK जैसी बड़ी पार्टी का अलग होना निश्चित रूप से चुनौती है, लेकिन विपक्षी दल फिलहाल यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि गठबंधन अभी भी सक्रिय है और भविष्य की राजनीति में उसकी भूमिका बनी रहेगी।
हमारी राय
INDIA गठबंधन की यह बैठक विपक्षी राजनीति के लिए महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन सिर्फ बैठकें करने से राजनीतिक मजबूती नहीं आती। असली परीक्षा तब होगी जब अलग-अलग विचारधाराओं और क्षेत्रीय हितों वाले दल किसी साझा रणनीति पर लंबे समय तक साथ चल पाएंगे। राहुल गांधी, ममता बनर्जी और अखिलेश यादव जैसे नेताओं की मौजूदगी ने विपक्षी एकता का संदेश दिया है, लेकिन DMK की गैरमौजूदगी यह भी दिखाती है कि गठबंधन के सामने चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि INDIA गठबंधन सिर्फ एक मंच बनकर रह जाता है या फिर वास्तव में एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरता है।









