मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात गर्म होते नजर आ रहे हैं। अमेरिका की तमाम कोशिशों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सीधी अपील के बावजूद इजराइल ने ईरान पर नए हमले कर दिए हैं। खास बात यह है कि ट्रंप ने खुद इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से कहा था कि वह ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई न करें और तनाव को बातचीत के जरिए कम करने की कोशिश करें। लेकिन घटनाक्रम ने अलग ही मोड़ ले लिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में ईरान ने इजराइल की ओर मिसाइलें दागी थीं। इसके बाद ट्रंप ने हस्तक्षेप करते हुए नेतन्याहू को फोन करने और हालात को और न बिगाड़ने की सलाह देने की बात कही थी। हालांकि इसके कुछ ही समय बाद इजराइल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों और रणनीतिक स्थानों को निशाना बनाया। 

 

आखिर शुरू कैसे हुआ नया विवाद?

मामले की शुरुआत उस वक्त हुई जब ईरान ने इजराइल की ओर कई मिसाइलें दागीं। यह अप्रैल में हुए युद्धविराम के बाद ईरान की पहली बड़ी सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है। इजराइल का कहना है कि यह हमला उसकी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा था, जबकि ईरान इसे अपनी प्रतिक्रिया बता रहा है। 

मिसाइल हमले के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। दुनिया को डर था कि कहीं फिर से बड़े स्तर पर युद्ध न शुरू हो जाए। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सामने आए और उन्होंने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की।

 

ट्रंप ने क्यों कहा- ‘अब और हमलों की जरूरत नहीं’

ट्रंप का मानना था कि दोनों देशों ने अपनी-अपनी कार्रवाई कर ली है और अब हालात को शांत करने की जरूरत है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह नेतन्याहू से बात करेंगे और उन्हें जवाबी हमला न करने की सलाह देंगे।

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित समझौता काफी करीब पहुंच चुका है। ऐसे में अगर फिर से बड़े सैन्य हमले शुरू होते हैं तो पूरी बातचीत पटरी से उतर सकती है। यही वजह थी कि अमेरिकी प्रशासन लगातार तनाव कम करने की कोशिश करता दिखाई दिया।

 

इजराइल ने नहीं मानी बात

ट्रंप की अपील के बावजूद इजराइली सेना ने ईरान के कई इलाकों पर हमले किए। रिपोर्ट्स के अनुसार मध्य और दक्षिणी ईरान के कुछ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। तेहरान के आसपास भी गतिविधियां तेज रहीं और कुछ महत्वपूर्ण ठिकानों पर मिसाइल हमलों की खबरें सामने आईं। 

इजराइल का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं कर सकता। अगर उसके ऊपर हमला होगा तो जवाब देना उसका अधिकार है। यही वजह है कि उसने अमेरिकी सलाह के बावजूद सैन्य कार्रवाई जारी रखी। 

 

नेतन्याहू और ट्रंप के बीच बढ़ रहे मतभेद?

कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू की सोच में अंतर दिखाई देने लगा है। ट्रंप जहां कूटनीतिक समाधान और समझौते पर जोर दे रहे हैं, वहीं इजराइल की सरकार सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सैन्य दबाव बनाए रखना चाहती है। 

विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के रिश्ते मजबूत जरूर हैं, लेकिन ईरान के मुद्दे पर रणनीति को लेकर मतभेद सामने आने लगे हैं। हालांकि दोनों पक्ष सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के खिलाफ कोई बड़ा बयान देने से बच रहे हैं।

 

ईरान ने भी दिखाया सख्त रुख

इजराइल की कार्रवाई के बाद ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उस पर दोबारा हमला हुआ तो जवाब और ज्यादा सख्त हो सकता है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान पहले ही साफ कर चुका है कि वह दबाव में आकर पीछे हटने वाला नहीं है। इसी वजह से पूरे क्षेत्र में फिर से सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

 

तेहरान एयरपोर्ट पर भी असर

तनाव बढ़ने के बीच ईरान ने सुरक्षा कारणों से तेहरान के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आने वाली उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया। यह कदम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि ईरान किसी भी संभावित खतरे को लेकर सतर्क हो गया है। हवाई सेवाओं पर असर पड़ने से यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। 

 

दुनिया क्यों चिंतित है?

मध्य पूर्व दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां होने वाला कोई भी बड़ा संघर्ष सिर्फ क्षेत्रीय नहीं रहता, बल्कि उसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ता है। ईरान और इजराइल के बीच सीधा टकराव बढ़ने का मतलब है कि पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है। यही वजह है कि अमेरिका समेत कई देश दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं। 

 

क्या शांति समझौता खतरे में है?

ट्रंप बार-बार यह कह रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौता अभी भी संभव है। उनका दावा है कि हालिया घटनाओं के बावजूद बातचीत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर दोनों देशों के बीच हमलों का सिलसिला जारी रहा तो किसी भी समझौते तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। इसलिए आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। 

 

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इजराइल और ईरान यहीं रुकेंगे या फिर तनाव और बढ़ेगा। दोनों देशों के बयान काफी सख्त हैं और कोई भी पक्ष कमजोर दिखना नहीं चाहता। दूसरी ओर अमेरिका लगातार मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। अगर कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं तो हालात संभल सकते हैं, लेकिन अगर सैन्य कार्रवाई जारी रही तो पूरे क्षेत्र में नया संकट खड़ा हो सकता है। 

 

हमारी राय

ईरान और इजराइल के बीच बढ़ता तनाव सिर्फ दो देशों का मामला नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। डोनाल्ड ट्रंप की अपील के बावजूद इजराइल का जवाबी हमला यह दिखाता है कि जमीन पर हालात कितने जटिल हो चुके हैं। इस समय सबसे जरूरी है कि दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई की बजाय बातचीत को मौका दें। क्योंकि इतिहास गवाह है कि युद्ध शुरू करना आसान होता है, लेकिन उसे खत्म करना बेहद मुश्किल। अगर समय रहते तनाव नहीं थमा तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।