चाणक्य नीति रोजमर्रा के छोटे-छोटे फैसले को बदलकर हमारी जिंदगी को सरल बनाती है। अगर आप हर रोज फैसला लेते वक्त चाणक्य नीति को फॉलो करें तो आपकी किस्मत चमक उठेगी। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर किसी को बहुत जल्दी सफल होने की लालसा रहती है। कोई करियर में आगे बढ़ना चाहता है, कोई फाइनेशियल रूप से मजबूत बनने चाहता है। कई मानसिक शांति और सम्मान चाहते हैं। ऐसे में लोग ये भूल जाते हैं कि किस्मत सिर्फ एकाएक लिए बड़े फैसलों से नहीं बल्कि रोज दिन के छोटे-छोटे फैसलों से बदलती है। आचार्य चाणक्य ने अपने ग्रंथ चाणक्य नीति में जीवन जीने के तरीके को बताया है। उन्होंने जीवन, व्यवहार, धन, मित्रता और बुद्धिमत्ता से जुड़े ऐसे सिद्धांत बताए हैं जो आज भी उतने ही प्रासंगिक लगते हैं। ये हमें बताते हैं कि इंसान का भविष्य उनकी रोज दिन के आदतों, सोच और दैनिक निर्णयों से तय होता है। आइए आज आपको बताते हैं कि चाणक्य नीति में वे कौन-से छोटे फैसले हैं जो आपकी किस्मत बदल सकते हैं। याद रखिए, हर छोटे फैसले मिलकर एक बड़ा परिवर्तन लाते हैं। चाणक्य नीति भी इसी पर आधारित है। 

 

जो भी बोले, सोच समझ कर बाले

 

चाणक्य नीति कहती है कि हर जगह मत बोलो और जब जरूरत पड़े वहीं बोलो। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि बिना सोचे बोले गए शब्द इंसान को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं। अकसर हम गुस्से में, अहंकार और जल्दबाजी में ऐसे शब्द बोल देते हैं तो हमारे मन पर लंबे समय तक गहरा प्रभाव डालते हैं। ये हमारे प्यारे रिश्तों को भी कई बार खराब कर देते हैं। इतना ही नहीं ये हमारे करियर और सम्मान को भी नुकसान पहुंचाते हैं। चाणक्य नीति कहती है कि बोलने से पहले विचार करें, कठोर सत्य कहने से बेहतर है चुप रहें, मीठी वाणी से शत्रु भी मित्र बन सकता है। इन 3 बातों को हमेशा ध्यान रखें। ये एक छोटा -सा फैसला कि कब बोलना है और कब चुप रहना है ये हमारी सामाजिक रूपरेखा और किस्मत दोनों को बदल देता है। 

 

सही समय पर सही निर्णय लो

 

चाणक्य नीति कहती है कि सही समय पर सही निर्णय लेना चाहिए। हाथ में आया मौका यदि एक बार चला गया तो वापस नहीं आता है। वहीं दूसरी तरफ ये भी ध्यान रखना चाहिए कि गलत समय पर लिया गया सही फैसला भी नुकसानदायक हो सकता है। हमें अपने फैसलों को लेकर सजग रहना चाहिए। कहीं हमारा फैसला गलत समय पर लिया गया तो ये उल्टा हमें ही नुकसान पहुंचा देगा। उदाहरण के लिए, कब निवेश करना है, कब नौकरी बदलनी है और कब चुप रहना है या आवाज उठानी है इन सबका सही समय होता है। उस सही समय पर फैसला जरूर लें। जो व्यक्ति समय की कीमत समझ लेता है वहीं आगे चलकर सफल हो पाता है।

 

आलस्य को हमेशा के लिए त्याग दो 

 

चाणक्य कहते हैं कि आलस मत करो। जिंदगी से आलस को हमेशा के लिए त्याग दो। चाणक्य नीति में आलस्य को इंसान का सबसे बड़ा शत्रु बताया गया है। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति आज का काम कल पर छोड़ता है उसकी किस्मत कभी साथ नहीं देती। यहीं वजह है कि कोई भी काम कल पर मत छोड़ो। जो दिमाग में आया है उसे उसी वक्त तुरंत निपटा लो। रोजमर्रा के छोटे फैसले जैसे- सुबह देर तक सोना या समय पर उठना, काम टालना या समय पर पूरा करना और अवसर को नजरअंदाज करना या अपनाना इन सब चीजों में आलस मत करो वरना किस्मत आपका साथ कभी नहीं देगी। 

 

पैसों को लेकर बुद्धिमानी से काम लें 

 

                                                               Image Credit:  Wikipedia 

 

चाणक्य नीति में कहा गया है कि पैसों को लेकर बुद्धिमानी से काम लें। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि धन वहीं टिकता है, जो बुद्धिमानी से कमाया और खर्च किया जाए। चाणक्य नीति में धन को साधन माना गया है, लक्ष्य नहीं। उदाहरण के लिए, फिजूलखर्ची से बचना, जरूरत और लालच में फर्क करना और भविष्य के लिए बचत करना। चाणक्य कहते हैं कि ये आदतें इंसान को आर्थिक रूप से मजबूत बनाती हैं। चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति धन का सम्मान करता है, धन उसी के पास ठहरता है।

 

सही लोगों की संगति जरूरी है 

 

चाणक्य नीति में कहा गया है कि सही लोगों के साथ मित्रता करें। जीवन को सुधारना है तो सही लोगों के संपर्क में रहें। याद रखें, एक सड़ा आलू झुंड में रखे हर अच्छे आलू को खराब बना देता है। वैसे ही मित्रता है। आप जिस किसी के संगत में रहेंगे वैसे ही बन जाएंगे। इस बात को हमेशा ध्यान रखें। जैसी आज आपकी संगति है वैसा ही आने वाला कल होगा। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि बुरी संगति इंसान को धीरे-धीरे बर्बादी की ओर ले जाती है। उदाहरण के लिए, आप किसके साथ समय बिताते हैं, किसकी सलाह मानते हैं और किन विचारों को अपनाते हैं...इनपर सोच समझकर फैसला लें इसमें संगति का अहम रोल है। 

 

आत्मसम्मान बनाए रखना

 

चाणक्य नीति के मुताबिक, खुद का आत्मसम्मान बनाए रखें। याद रखें, आपका आत्मसम्मान आपके लिए सबसे बड़ी पूंजी है। आचार्य चाणक्य का कहना है कि जो व्यक्ति अपना सम्मान खो देता है, वह सब कुछ खो देता है। उदाहरम के लिए- गलत के सामने झुकना या विरोध करना, खुद को कम आंकना या आत्मविश्वास रखना आदि। 

 

संकट में धैर्य बनाए रखें

 

चाणक्य नीति सिखाती है कि कठिन परिस्थिति में लिया गया शांत फैसला ही सही परिणाम देता है। गुस्से, डर और घबराहट में लिया गया निर्णय अक्सर गलत साबित होता है। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि हमेशा धैर्य रखता है और स्थिति को समझकर कोई भी फैसला करता है।