एक समय था जब हाथ में स्मार्टफोन होना स्टेटस सिंबल था। नया फोन, बड़ा स्क्रीन साइज, हाई एंड कैमरा और सोशल मीडिया पर लगातार एक्टिव रहना यही पहचान थी। लेकिन आज की तस्वीर बदल रही है। लेकिन आज Gen Z यानी 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी अब फोन से दूरी बनाने लगी है। हैरानी की बात ये है कि आजकल फोन का कम इस्तेमाल करना या डिजिटल डिटॉक्स अपनाना यह gen Z का नया स्टेटस बन चुका है।
स्मार्टफोन से थक चुकी अब Gen Z
आज Gen Z को डिजिटल नेटिव कहा जाता है। मतलब कि ये पीढी इंटरनेट और स्मार्टफोन के साथ ही बड़ी हुई है। स्कूल से लेकर कॉलेज, दोस्ती से लेकर रिश्ते और लड़ाई से लेकर नौकरी तक...सब कुछ स्क्रीन पर। लेकिन यही स्क्रीन यानी मोबाइल फोन अब Gen Z के लिए थकान का कारण बन चुका है। लगातार मिल रहे नोटिफिकेशन, लाइक और फोलोवर की होड़ और ज्यादा ऑनलाइन रहने का दबाव इन सब ने Gen Z को मानसिक रूप से था दिया है। इसका असर ये हुआ कि अब ये युवा पीढ़ी शांति की ओर आगे बढ़ रही है और सोशल मीडिया पर ऑनलाइन कम आना शुरू कर चुकी है। अब Gen Z detox lifestyle अपनाना चाह रही है। आज ये ऑफलाइन रहने का ट्रेंड इतना चलन में आ चुका है कि आज युवा खुद कह रहे हैं कि ऑनलाइन कम रहना ही असली आजादी है।
डिजिटल डिटॉक्स लाइफस्टाइल क्या है
डिजिटल डिटॉक्स का मतलब होता है कि कुछ समय के लिए मोबाइल, सोशल मीडिया, इंटरनेट, ईमेल और डिजिटल डिवाइसेज से दूरी बना लेना।आज की युवा पीढ़ी इसे अलग तरीके से अपना रही है। आज Gen Z दिन में तय समय पर ही फोन का इस्तेमाल कर रही है। ये सोशल मीडिया ऐप को डिलीट कर रही है या म्यूट कर रही है। नोटिफिकेशन ऑफ रखने लगी है ताकि काम के दौरान ये एप्स डिस्टर्ब न करें। वीकेंड पर नो फोन डे मनाना ताकि मानसिक शांति मिल सके और ये ज्यादा से ज्यादा क्वालिटी टाइम एक्सपैंड कर सके। ये Gen Z पुराने फीचर फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। अब ये आदतें एक Gen Z के लिए हेल्थ हॉबिट ही नहीं बल्कि लाइफस्टाइल स्टेटमेंट बन चुका है। इसे ही डिजिटल डिटॉक्स लाइफस्टाइल का नाम दिया गया है।
सोशल मीडिया से दूर जी रहे असली ज़िंदगी
आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया से दूर होकर वास्तविक जिंदगी में अच्छे पलों को कैद करना चाहते हैं। इंस्टाग्राम की परफेक्ट तस्वीरें, रील में दिखती खुशी और फिल्टर लगी मुस्कान ये सब एक भ्रम है। इस भ्रम ने कई युवाओं को डिप्रेशन में डाल दिया है।
डिजिटल डिटॉक्स लाइफस्टाइल के फायदे
डिजिटल डिटॉक्स लाइफस्टाइल के कई फायदे हैं। Gen Z को रिश्ते ज्यादा सच्चे लगने लगे हैं। उनकी बातचीत के तरीके में गहराई आई है। खुद को समझने के लिए Gen Z यानी आज की युवा पीढ़ी को समय मिला है। दिमाग भी ज्यादा शांत रहने लगा है यानि फोन से दूरी ने मेंटल पीस वापस दिलाई है। कॉफी शॉप में बिना फोन बैठे रहना, ट्रैवल के दौरान इंस्टाग्राम पोस्ट न करना या दोस्तों के साथ बातचीत में फोन जेब में रखन ...ये सब अब कूल माना जा रहा है। Gen Z का कहना है कि अगर तुम हर समय ऑनलाइन नहीं हो तो तुम पावरफुल हो।

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आज Gen Z work life balance को प्राथमिकता दे रही है। जैसे...ऑफिस के बाद ईमेल चेक नहीं करना, वर्क चैट को तय समय में सीमित रखना, छुट्टी के दिन फोन से पूरी तरफ दूरी बनाए रखना आदि। ये युवा पीढ़ी मानती है कि लगातार उपलब्ध रहना प्रोफेशनल्स रवैया नहीं है बल्कि बर्नआउट की शुरूआत है।
डिजिटल डिटॉक्स लाइफस्टाइल के साथ कई पुराने ट्रेंड भी लौट रहे हैं। जैसे..डेयरी लिखना, किताबें पढ़ना, सुबह टहलना, बिना स्क्रीन देखे गाने सुनना, दोस्तों के साथ मस्ती मजाक करना। ये आदतें युवा पीढ़ी को स्लो लाइफ की ओर ले जा रहे हैं।
क्या फोन से दूरी पूरी तरह संभव है
सच तो ये है कि डिजिटल डिटॉक्स पूरी तरह तो संभव नहीं है क्योंकि फोन हमारे काम करने की जरूरत है, डेली लाइफ रुटीन में शुमार है। पढ़ाई, नौकरी, बैंकिंग, टिकट बुकिंग सब कुछ डिजिटल हो चुका है। मनोविज्ञान कहता है कि लगातार स्क्रीन देखने से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता घटती है, हमारी नींद भी प्रभावित होती है, तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ता है। लेकिन डिटॉक्स सिस्टम इन समस्याओं को काफी हद तक कम कर देता है। खासकर युवाओं के लिए ये मानसिक सेहत का मजबूत सहारा बन चुका है।
आज Gen Z ने ये साबित कर दिया है कि स्टेटस सिंबल हमेशा दिखावे से नहीं बनता। आज के दौर में फोन से दूरी, खुद से जुड़ाव का साधन है। डिजिटल डिटॉक्स सिर्फ एक साधन नहीं बल्कि नई सोच है जो इस दुनिया में युवा पीढ़ी को ठहरना सिखा रही है।
हमारे लिए आज सबसे जरूरी है कि खुद को मानसिक शांति प्रदान करना। जब आप फोन का कम इस्तेमाल करते हैं तो दिमाग पर प्रेशर कम पड़ता है जो आपके मानसिक संतुलन को बनाए रखता है। आप खुश रह पाते हैं, खुद को शांत रख पाते हैं, सही फैसला सही समय पर लेने में समर्थ हो पाते हैं। सबसे जरूरी कि आज की युवा पीढ़ी फोन से दूरी तो बढ़ा रही है वही दूसरी ओर अध्यात्म को अपना रही है यानि वो खुद को समझने में ज्यादा टाइम दे रही है। ऐसे में इनका आने वाला भविष्य उज्जवल होगा। ये अपना करियर के ऊपर ध्यान दे पाएंगे। ये खुली सोच और खुशमिजाजी युवा पीढ़ी है क्योंकि इन्होंने बर्नआउट को त्यागकर डिजिटल डिटॉक्स लाइफस्टाइल अपनाई है।









