आजकल प्रोटीन सिर्फ जिम जाने वालों की चीज नहीं रह गया है। सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करें, सुपरमार्केट में घूमें या किसी कैफे का मेन्यू देखें, हर जगह हाई-प्रोटीन शेक, स्नैक्स, आटा, सीरियल और कई प्रोडक्ट्स नजर आते हैं। इन सबका एक ही मैसेज है – ज्यादा प्रोटीन खाओ, वजन कम करो, मसल्स बनाओ और पेट लंबे समय तक भरा रहे। लेकिन न्यूट्रिशन की दुनिया इतनी सीधी नहीं है। प्रोटीन शरीर के लिए बहुत जरूरी है, लेकिन क्या हर किसी को दोगुना-तिगुना प्रोटीन लेना चाहिए? एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यह ट्रेंड जरूरत से ज्यादा बढ़ गया है और कई बार यह सेहत के लिए नुकसानदेह भी साबित हो सकता है।

 

प्रोटीन शरीर की बुनियाद है। यह टिश्यू की मरम्मत करता है, मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, हार्मोन और एंजाइम बनवाने में मदद करता है और इम्यून सिस्टम को सपोर्ट देता है। शरीर प्रोटीन को अमीनो एसिड में बदलता है, जो कई महत्वपूर्ण कामों में इस्तेमाल होते हैं। भारतीय आहार में अक्सर अनाज ज्यादा और प्रोटीन कम होता है, इसलिए संतुलित तरीके से प्रोटीन बढ़ाना फायदेमंद है। लेकिन मार्केट में उपलब्ध हाई-प्रोटीन प्रोडक्ट्स का बोलबाला देखकर लगता है कि लोग जरूरत से ज्यादा इसकी ओर भाग रहे हैं।

 

एक्सपर्ट्स की राय क्या है?

 

मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, न्यूट्रिशन कहते हैं कि प्रोटीन की जरूरत उम्र, लिंग, शारीरिक गतिविधि और मेटाबॉलिक स्थिति पर निर्भर करती है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की गाइडलाइंस के मुताबिक स्वस्थ वयस्कों के लिए प्रोटीन की सिफारिश 0.83 ग्राम प्रति किलो बॉडी वेट प्रतिदिन है। यानी 60 किलो वजन वाले व्यक्ति को करीब 50 ग्राम प्रोटीन रोजाना काफी है। लेकिन व्यायाम करने वालों या कुछ खास स्थितियों में यह 1.2 ग्राम तक बढ़ सकती है।

 

भारतीय आहार में प्रोटीन अक्सर कम पाया जाता है, खासकर प्लांट-बेस्ड सोर्स से। दाल, चना, राजमा, सोया, दूध, दही, पनीर, अंडा और चिकन जैसे फूड अच्छे विकल्प हैं। कुछ स्टडीज दिखाती हैं कि व्यायाम के साथ ज्यादा प्रोटीन लेने से वजन कम करने और ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद मिल सकती है, खासकर टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों में। प्लांट-बेस्ड प्रोटीन जैसे दाल और बीन्स हार्ट के लिए बेहतर माने जाते हैं क्योंकि इनमें फाइबर ज्यादा होता है। लेकिन अत्यधिक प्रोटीन के चमत्कारी फायदे के सबूत बहुत मजबूत नहीं हैं।

 

किडनी पर पड़ सकता है असर

 

बहुत ज्यादा प्रोटीन लेने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। शरीर प्रोटीन को तोड़कर यूरिया और अन्य वेस्ट प्रोडक्ट्स बनाता है, जिन्हें किडनी फिल्टर करती है। अगर पहले से किडनी की समस्या हो तो यह स्थिति और खराब हो सकती है। कई न्यूट्रिशनिस्ट्स और नेफ्रोलॉजिस्ट्स चेतावनी देते हैं कि एक्सेस प्रोटीन, खासकर एनिमल प्रोटीन या सप्लीमेंट्स से, किडनी की कार्यक्षमता पर बुरा असर डाल सकता है। हेल्दी लोगों में भी लंबे समय तक बहुत ज्यादा प्रोटीन लेने से किडनी हाइपरफिल्ट्रेशन हो सकता है, जो आगे चलकर नुकसान पहुंचा सकता है।
 

इसके अलावा ज्यादा प्रोटीन लेने से फाइबर, विटामिन्स और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। इससे पाचन संबंधी समस्याएं जैसे कब्ज बढ़ सकती हैं। प्रोटीन पाउडर या सप्लीमेंट्स बिना डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह के लेना जोखिम भरा है। हाई-प्रोटीन डाइट तब समस्या बन सकती है जब फाइबर और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स बैलेंस न हों, किडनी की समस्या पहले से हो या सप्लीमेंट्स बिना देखरेख के लिए जाएं।

 

कितना प्रोटीन काफी है?

 

सामान्य तौर पर 0.8 से 1.2 ग्राम प्रति किलो बॉडी वेट पर्याप्त माना जाता है। ICMR 2020 गाइडलाइंस में स्वस्थ एडल्ट्स के लिए सेफ इंटेक 0.83 ग्राम रखा गया है। ज्यादा एक्टिव लोग, एथलीट्स या बुजुर्गों को थोड़ा ज्यादा चाहिए। लेकिन आम आदमी के लिए मार्केट के हाई-प्रोटीन प्रोडक्ट्स अक्सर जरूरत से ज्यादा देते हैं।

 

एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि हर मील में एक प्रोटीन सोर्स जरूर शामिल करें। नाश्ते में दूध, अंडा या स्प्राउट्स लें। दोपहर या रात के खाने में दाल, दही, पनीर या चिकन रखें। स्नैक्स में बिस्किट की जगह मेवे, भुना चना या योगर्ट चुनें। इससे प्रोटीन नैचुरल तरीके से मिलेगा और बैलेंस बना रहेगा।

 

ट्रेंड के पीछे क्या है?

 

हाई-प्रोटीन प्रोडक्ट्स का बाजार तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि लोग फिटनेस, वेट लॉस और बेहतर हेल्थ की तलाश में हैं। लेकिन कई बार मार्केटिंग जरूरत से ज्यादा हाइप क्रिएट करती है। रिसर्च दिखाती है कि संतुलित डाइट में प्रोटीन बढ़ाना फायदेमंद है, लेकिन बिना वजह बहुत ज्यादा लेना फायदे से ज्यादा नुकसान कर सकता है। हार्ट हेल्थ पर भी असर पड़ सकता है अगर एनिमल प्रोटीन ज्यादा हो और फाइबर कम हो।
 

निष्कर्ष में कहें तो प्रोटीन जरूरी है, लेकिन बैलेंस सबसे महत्वपूर्ण है। भारतीय डाइट में प्रोटीन की कमी आम है, इसलिए इसे बढ़ाना अच्छा है, लेकिन ट्रेंड के चक्कर में ओवरडू न करें। डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह लें, खासकर अगर कोई हेल्थ इश्यू हो। नैचुरल फूड्स से प्रोटीन लें और पूरी डाइट बैलेंस रखें। इससे लंबे समय तक सेहत अच्छी रहेगी और अनावश्यक जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा।