आजकल फिट रहने के लिए लोग जिम, योगा, रनिंग और कई तरह की एक्सरसाइज करते हैं। लेकिन एक ऐसी आसान एक्सरसाइज भी है जिसे बचपन में लगभग हर किसी ने किया होगा और अब वही फिटनेस की दुनिया में फिर से ट्रेंड बन चुकी है। हम बात कर रहे हैं रस्सी कूदने यानी स्किपिंग की।
फिटनेस एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति रोज सिर्फ 10 मिनट भी रस्सी कूदता है तो इसका असर शरीर पर धीरे-धीरे दिखने लगता है। खास बात यह है कि इसके लिए महंगे जिम या भारी मशीनों की जरूरत नहीं होती। सिर्फ एक रस्सी और थोड़ी सी जगह काफी होती है।
क्यों फिर से लोकप्रिय हो रही है स्किपिंग?
कुछ वर्षों पहले तक लोग रस्सी कूदने को सिर्फ बच्चों का खेल मानते थे। लेकिन अब फिटनेस इंडस्ट्री में इसे एक असरदार कार्डियो एक्सरसाइज माना जा रहा है।
कई सेलिब्रिटीज और एथलीट भी अपनी वर्कआउट रूटीन में स्किपिंग शामिल करते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि कम समय में ज्यादा कैलोरी बर्न करने में यह मदद कर सकती है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास लंबे वर्कआउट का समय नहीं होता। ऐसे में 10 मिनट की स्किपिंग एक आसान और असरदार विकल्प बनकर सामने आई है।
दिल की सेहत के लिए फायदेमंद
फिटनेस विशेषज्ञों के अनुसार रस्सी कूदना एक बेहतरीन कार्डियो एक्सरसाइज है। जब आप लगातार स्किपिंग करते हैं तो हार्ट रेट बढ़ता है और दिल ज्यादा सक्रिय रूप से काम करता है।
धीरे-धीरे इससे स्टैमिना बेहतर हो सकता है और शरीर की सहनशक्ति बढ़ सकती है। कई रिसर्च में भी यह बात सामने आई है कि नियमित कार्डियो एक्सरसाइज दिल की सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती है। यही वजह है कि फिटनेस ट्रेनर अक्सर वजन घटाने के साथ-साथ हार्ट हेल्थ के लिए भी स्किपिंग की सलाह देते हैं।
वजन कम करने में कैसे मदद करती है?
आजकल बढ़ता वजन लोगों की सबसे बड़ी परेशानियों में से एक बन चुका है। घंटों ऑफिस में बैठना, जंक फूड और कम फिजिकल एक्टिविटी की वजह से मोटापा तेजी से बढ़ रहा है।
स्किपिंग को हाई कैलोरी बर्निंग एक्सरसाइज माना जाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति लगातार 10 मिनट तक सही तरीके से रस्सी कूदता है तो वह अच्छी मात्रा में कैलोरी बर्न कर सकता है। हालांकि सिर्फ स्किपिंग से वजन कम नहीं होता। इसके साथ सही खानपान और अच्छी लाइफस्टाइल भी जरूरी होती है।
पैरों और शरीर की मांसपेशियां होती हैं मजबूत
जब कोई व्यक्ति रस्सी कूदता है तो सिर्फ पैर ही नहीं बल्कि शरीर के कई हिस्से एक्टिव होते हैं। इसमें पैरों, कंधों, पेट और हाथों की मांसपेशियां भी काम करती हैं।
नियमित स्किपिंग करने से पैरों की ताकत और बॉडी बैलेंस बेहतर हो सकता है। यही वजह है कि कई खिलाड़ी इसे अपने ट्रेनिंग रूटीन का हिस्सा बनाते हैं।बॉक्सिंग खिलाड़ियों के बीच तो स्किपिंग काफी लोकप्रिय मानी जाती है क्योंकि इससे फुर्ती और फुटवर्क बेहतर होता है।
मानसिक तनाव कम करने में भी मदद
फिटनेस का असर सिर्फ शरीर पर नहीं बल्कि दिमाग पर भी पड़ता है। एक्सरसाइज करने से शरीर में एंडोर्फिन जैसे “फील गुड” हार्मोन रिलीज होते हैं, जो मूड बेहतर करने में मदद कर सकते हैं।
आजकल तनाव और चिंता लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में रोज कुछ मिनट की फिजिकल एक्टिविटी मानसिक रूप से भी राहत दे सकती है। कई लोग कहते हैं कि स्किपिंग करने के बाद उन्हें ज्यादा एनर्जी और पॉजिटिव फील होता है।
शरीर का बैलेंस और कोऑर्डिनेशन होता है बेहतर
रस्सी कूदते समय शरीर और दिमाग दोनों को एक साथ काम करना पड़ता है। हाथों की मूवमेंट, पैरों की टाइमिंग और शरीर का बैलेंस, सब कुछ एक साथ चलता है।
इसी वजह से स्किपिंग को बॉडी कोऑर्डिनेशन सुधारने वाली एक्सरसाइज भी माना जाता है। बच्चों से लेकर बड़े तक, हर उम्र के लोग इससे फायदा उठा सकते हैं।
क्या हर कोई कर सकता है स्किपिंग?
हालांकि स्किपिंग फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए एक जैसी नहीं होती। जिन लोगों को घुटनों, टखनों या कमर में गंभीर दर्द की समस्या है, उन्हें पहले डॉक्टर या फिटनेस एक्सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए।
क्योंकि रस्सी कूदने में शरीर पर बार-बार हल्का झटका पड़ता है। अगर सही तरीके से न किया जाए तो चोट का खतरा भी हो सकता है। इसीलिए शुरुआत हमेशा धीरे-धीरे करने की सलाह दी जाती है।
शुरुआत कैसे करनी चाहिए?
अगर कोई पहली बार स्किपिंग शुरू कर रहा है तो उसे शुरुआत में ज्यादा देर तक लगातार नहीं कूदना चाहिए। पहले 1-2 मिनट से शुरुआत करनी चाहिए और फिर धीरे-धीरे समय बढ़ाना चाहिए।
सही जूते पहनना भी जरूरी माना जाता है ताकि पैरों और घुटनों पर ज्यादा दबाव न पड़े। इसके अलावा समतल जगह पर स्किपिंग करना बेहतर रहता है।फिटनेस ट्रेनर कहते हैं कि सही तकनीक के साथ की गई स्किपिंग ज्यादा सुरक्षित और असरदार होती है।
सिर्फ 10 मिनट क्यों माने जाते हैं असरदार?
कई लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या सिर्फ 10 मिनट की एक्सरसाइज से सच में फर्क पड़ सकता है? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर एक्सरसाइज सही तरीके और नियमितता से की जाए तो कम समय भी असर दिखा सकता है।
दरअसल स्किपिंग हाई इंटेंसिटी एक्टिविटी मानी जाती है। यानी कम समय में शरीर ज्यादा मेहनत करता है। यही वजह है कि छोटी अवधि का वर्कआउट भी फायदेमंद हो सकता है।
लाइफस्टाइल में जरूरी हो गई एक्टिविटी
आज की जिंदगी में लोग घंटों मोबाइल और लैपटॉप के सामने बैठे रहते हैं। बच्चों से लेकर बड़े तक, फिजिकल एक्टिविटी लगातार कम होती जा रही है।
ऐसे में स्किपिंग जैसी आसान एक्सरसाइज लोगों को फिर से एक्टिव बनाने में मदद कर सकती है। इसके लिए न ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं और न ही किसी खास जगह की जरूरत होती है।
नियमितता सबसे ज्यादा जरूरी
फिटनेस एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोई भी एक्सरसाइज तभी असर दिखाती है जब उसे नियमित रूप से किया जाए। सिर्फ एक-दो दिन रस्सी कूदने से बड़ा बदलाव नहीं दिखेगा।
लेकिन अगर कोई व्यक्ति रोज 10 मिनट भी लगातार स्किपिंग करता है और साथ में खानपान का ध्यान रखता है, तो धीरे-धीरे शरीर में फर्क महसूस हो सकता है। यही वजह है कि आजकल स्किपिंग को ‘सिंपल लेकिन असरदार फिटनेस हैबिट’ माना जा रहा है।









