Health News: ब्रश करते वक्त मसूड़ों से खून आना, मुंह से बदबू आते रहना या मसूड़ों में बार-बार सूजन होना, इन सबको हम अक्सर एक आम दांत की समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ लोग तो बस नमक-पानी से कुल्ला करके इसे भूल जाते हैं। लेकिन अगर यही समस्या बार-बार हो रही है और जल्दी ठीक नहीं हो रही तो यह सिर्फ आपके मुंह की नहीं बल्कि पूरे शरीर की एक बड़ी बीमारी का इशारा हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक मसूड़ों की बीमारी और डायबिटीज के बीच एक बेहद गहरा और दोतरफा संबंध होता है जिसे समझना बेहद जरूरी है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि मसूड़ों की बीमारी को गम डिजीज या पेरियोडोंटल डिजीज कहते हैं और यह सिर्फ मुंह तक सीमित नहीं रहती। यह बीमारी शरीर के दूसरे हिस्सों को भी प्रभावित कर सकती है और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी के साथ मिलकर हालत और बिगाड़ सकती है। इसलिए इसे हल्के में लेना किसी के लिए भी सही नहीं है।
डायबिटीज और मसूड़ों की बीमारी का क्या है कनेक्शन

यह बात सुनने में थोड़ी अजीब लग सकती है कि मुंह के मसूड़ों का ब्लड शुगर से क्या लेना-देना। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इन दोनों के बीच का रिश्ता बेहद मजबूत और साइंटिफिक तरीके से साबित हो चुका है। जब किसी को डायबिटीज होती है तो उनके खून में शुगर का लेवल लगातार ज्यादा बना रहता है। इसकी वजह से शरीर की इम्युनिटी यानी बीमारियों से लड़ने की ताकत कमजोर पड़ जाती है। जब इम्युनिटी कमजोर होती है तो शरीर के किसी भी हिस्से में बैक्टीरिया आसानी से पनप सकते हैं और मुंह तो वैसे भी ऐसी जगह है जहां बैक्टीरिया की संख्या पहले से ही बहुत ज्यादा होती है। ऐसे में डायबिटीज के मरीजों के मसूड़ों में इन्फेक्शन बहुत जल्दी हो जाता है और एक बार हो जाए तो ठीक भी बहुत देर से होता है।
इसके अलावा हाई ब्लड शुगर की वजह से लार में भी ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है। यह बढ़ा हुआ ग्लूकोज मुंह के बैक्टीरिया के लिए खाने का काम करता है जिससे बैक्टीरिया और तेजी से बढ़ते हैं। इन बैक्टीरिया की वजह से दांतों और मसूड़ों पर प्लाक जमा होने लगती है जो आगे चलकर गम डिजीज में बदल जाती है। कई रिसर्च में यह साबित हुआ है कि डायबिटीज के मरीजों में मसूड़ों की बीमारी होने का खतरा आम लोगों के मुकाबले कहीं ज्यादा होता है।
मसूड़ों की बीमारी से डायबिटीज भी हो सकती है बेकाबू
यहां सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह रिश्ता सिर्फ एक तरफ से नहीं बल्कि दोनों तरफ से काम करता है। यानी डायबिटीज की वजह से गम डिजीज होती है और गम डिजीज की वजह से डायबिटीज और बेकाबू हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब मसूड़ों में इन्फेक्शन होती है तो शरीर में इन्फ्लेमेशन यानी सूजन बढ़ जाती है। यह सूजन खून में कुछ ऐसे केमिकल्स छोड़ती है जो इंसुलिन के काम में रुकावट डालते हैं। जब इंसुलिन सही से काम नहीं करता तो ब्लड शुगर और ज्यादा बढ़ जाती है और डायबिटीज कंट्रोल करना और मुश्किल हो जाता है।
इसे एक ऐसा दुष्चक्र समझ सकते हैं जहां एक बीमारी दूसरी को और बढ़ाती है और दूसरी पहली को। इसीलिए विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर किसी को डायबिटीज है तो उसे अपने मसूड़ों का खास ख्याल रखना चाहिए और अगर किसी को बार-बार मसूड़ों की समस्या हो रही है तो उसे अपना ब्लड शुगर भी चेक करवाना चाहिए।
Health News: इन लक्षणों को कभी मत करें इग्नोर, तुरंत डेंटिस्ट के पास जाएं
मसूड़ों की बीमारी शुरुआत में बहुत हल्की लगती है लेकिन धीरे-धीरे यह गंभीर रूप ले लेती है। शरीर कुछ संकेत पहले से देने लगता है जिन्हें समझना बेहद जरूरी है। सबसे पहला और सबसे आम संकेत है ब्रश करते वक्त मसूड़ों से खून आना। बहुत से लोग इसे नॉर्मल समझते हैं लेकिन यह नॉर्मल बिल्कुल नहीं है। स्वस्थ मसूड़ों से ब्रशिंग के दौरान खून नहीं आना चाहिए।
इसके अलावा मसूड़ों का लाल होना या सूजा हुआ दिखना, मुंह से लगातार बदबू आना जो ब्रश करने के बाद भी ठीक न हो, दांत ढीले लगना या खाते वक्त दर्द होना, और मसूड़ों का दांतों से पीछे हटना भी गम डिजीज के अहम संकेत हैं। अगर ये लक्षण लगातार बने रहें तो बिना देर किए डेंटिस्ट से मिलना चाहिए। साथ ही ब्लड शुगर की जांच भी जरूर करवानी चाहिए क्योंकि कई बार मसूड़ों की बार-बार होने वाली समस्या डायबिटीज का पहला इशारा भी हो सकती है जो अभी तक पकड़ में नहीं आई।
मसूड़ों को स्वस्थ रखने के लिए रोज सुबह और रात को सोने से पहले ब्रश करना जरूरी है। फ्लॉसिंग की आदत डालें क्योंकि ब्रश से दांतों के बीच की सफाई नहीं होती। हर छह महीने में एक बार डेंटल चेकअप जरूर करवाएं। अगर डायबिटीज है तो ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखें क्योंकि यही मसूड़ों की सेहत की सबसे बड़ी गारंटी है। मीठा और चिपचिपा खाना कम खाएं, खूब पानी पिएं और रोज कम से कम तीस मिनट एक्सरसाइज करें। इन आदतों से न सिर्फ मसूड़े बल्कि पूरा शरीर स्वस्थ रहेगा।
Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। The Headlines हिंदी अपने पाठकों को हेल्थ, डाइट और फिटनेस से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने डॉक्टरों से सलाह लेने का सुझाव देता है।









