Char Dham Yatra 2026: उत्तराखंड सरकार ने चार धाम यात्रा 2026 के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम में एक महत्वपूर्ण बदलाव करने का फैसला किया है। अब तक श्रद्धालुओं के लिए यह रजिस्ट्रेशन पूरी तरह मुफ्त था, लेकिन इस बार से इसके लिए एक निश्चित शुल्क लिया जाएगा।
फर्जी रजिस्ट्रेशन की बढ़ती समस्या को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने यह निर्णय लिया है। फीस की राशि तय करने के लिए गढ़वाल डिवीजन के एडिशनल कमिश्नर की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है। गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने बताया है कि कम से कम 10 रुपये फीस लिए जाने का सुझाव दिया गया है। कमेटी की रिपोर्ट और सरकार की मंजूरी के बाद अंतिम फीस तय की जाएगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
चार धाम यात्रा उत्तराखंड की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा है। हर साल लाखों श्रद्धालु यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन के लिए आते हैं। पिछले कुछ वर्षों में यात्रियों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
इस बढ़ती भीड़ के प्रबंधन के लिए सरकार ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू किया था। लेकिन मुफ्त रजिस्ट्रेशन होने के कारण फर्जी और डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन की समस्या सामने आई। कई लोग एक से अधिक तारीखों पर रजिस्ट्रेशन करा लेते थे और फिर केवल एक तारीख पर यात्रा करते थे। इससे अन्य श्रद्धालुओं को स्लॉट नहीं मिल पाता था।
इसके अलावा, कुछ दलाल और एजेंट भारी संख्या में फर्जी रजिस्ट्रेशन करके उन्हें बाद में मोटी रकम पर बेचते थे। इस गोरखधंधे से वास्तविक तीर्थयात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। फीस लागू करने से ऐसे फर्जी रजिस्ट्रेशन पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी।
कमेटी करेगी अंतिम फीस तय
फीस की सटीक राशि तय करने के लिए गढ़वाल डिवीजन के एडिशनल कमिश्नर की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी यात्रा से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगी और एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करेगी।
कमेटी इस बात का भी ध्यान रखेगी कि फीस इतनी अधिक न हो कि आर्थिक रूप से कमजोर श्रद्धालु यात्रा से वंचित हो जाएं। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि फीस से प्राप्त राशि का उपयोग यात्रा व्यवस्था को बेहतर बनाने में किया जाए।
कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद इसे उत्तराखंड सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद ही अंतिम फीस निर्धारित की जाएगी और ऑनलाइन पोर्टल पर लागू की जाएगी।
देवभूमि उत्तराखंड और चार धाम की महत्ता
उत्तराखंड को 'देवभूमि' यानी देवताओं की भूमि कहा जाता है। यहां की पहाड़ियां, नदियां और वादियां सदियों से ऋषि-मुनियों की तपस्थली रही हैं। इस पावन भूमि पर कदम-कदम पर धार्मिक स्थल हैं और हर साल करोड़ों श्रद्धालु यहां आते हैं।
इनमें सबसे प्रमुख और पवित्र है चार धाम यात्रा। हिमालय की गोद में स्थित चारों धाम न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से भी अद्वितीय हैं। ऊंचाई पर स्थित ये मंदिर वर्ष में लगभग छह महीने बर्फ की चादर में ढके रहते हैं और बाकी छह महीने श्रद्धालुओं के लिए खुले रहते हैं।
चारों पवित्र स्थलों का परिचय
चार धाम यात्रा में चार पवित्र मंदिर शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है।
यमुनोत्री उत्तरकाशी जिले में यमुना नदी के उद्गम स्थल के निकट एक संकरी घाटी में स्थित है। यह मंदिर देवी यमुना को समर्पित है। यमुना नदी गंगा के बाद भारत की दूसरी सबसे पवित्र नदी मानी जाती है। यहां गर्म पानी के कुंड भी हैं जिनमें भक्त आलू और चावल पकाते हैं और उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
गंगोत्री भी उत्तरकाशी जिले में स्थित है। यह मंदिर देवी गंगा को समर्पित है, जो भारत की सबसे पवित्र नदी मानी जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, यहीं से भागीरथ ने घोर तपस्या करके गंगा को पृथ्वी पर उतारा था।
केदारनाथ रुद्रप्रयाग जिले में भगवान शिव को समर्पित है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और पंच केदार में भी इसका विशेष स्थान है। 2013 की विनाशकारी बाढ़ के बाद इसका पुनर्निर्माण किया गया और अब यह पहले से अधिक सुव्यवस्थित और सुंदर है।
बद्रीनाथ चमोली जिले में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है। यह पवित्र बद्रीनारायण मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। बद्रीनाथ चार धाम यात्रा का अंतिम पड़ाव है और यहां के दर्शन को सबसे फलदायी माना जाता है।
यात्रा का सही क्रम और समय
शास्त्रों के अनुसार चार धाम यात्रा घड़ी की सुई की दिशा में, यानी पूर्व से पश्चिम और फिर उत्तर की ओर पूरी करनी चाहिए। इसलिए यात्रा यमुनोत्री से प्रारंभ होती है, फिर गंगोत्री, उसके बाद केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ के दर्शन होते हैं।
इन चारों धामों के कपाट प्रति वर्ष अप्रैल या मई माह में खुलते हैं और अक्टूबर या नवंबर में बंद हो जाते हैं। कपाट खुलने और बंद होने की तिथियां हर साल पंचांग के आधार पर तय की जाती हैं और बसंत पंचमी या महाशिवरात्रि के अवसर पर घोषित की जाती हैं।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को उच्च ऊंचाई और कठिन पहाड़ी रास्तों का सामना करना पड़ता है। केदारनाथ और यमुनोत्री तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर की पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है। हालांकि, हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध है जो शारीरिक रूप से अक्षम या बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए एक सुविधाजनक विकल्प है।
चार धाम यात्रा की तैयारी कैसे करें?
चार धाम यात्रा पर जाने से पहले कुछ जरूरी तैयारियां करना आवश्यक है। सबसे पहले शारीरिक स्वास्थ्य की जांच करवाएं क्योंकि उच्च ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी और कड़ी ट्रेकिंग के लिए शरीर का स्वस्थ होना जरूरी है। हृदय रोग और सांस की बीमारी वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
ऊनी कपड़े, रेनकोट, आरामदायक ट्रेकिंग जूते, टॉर्च, प्राथमिक चिकित्सा किट और पर्याप्त मात्रा में पानी और हल्का नाश्ता साथ रखें। पहाड़ में मौसम अचानक बदल सकता है, इसलिए हमेशा तैयार रहें। अब जब रजिस्ट्रेशन फीस लागू होने जा रही है, तो श्रद्धालुओं को अधिकारिक वेबसाइट पर ध्यान देना होगा। किसी भी अनधिकृत वेबसाइट या दलाल के माध्यम से रजिस्ट्रेशन न करें।
यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं पर ध्यान
उत्तराखंड सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में चार धाम यात्रा की व्यवस्थाओं में काफी सुधार किया है। केदारनाथ पुनर्निर्माण परियोजना के तहत मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र का भव्य पुनर्निर्माण हुआ है। यात्रा मार्ग पर हेल्थ पोस्ट, विश्राम स्थल और आपदा प्रबंधन के इंतजाम किए गए हैं।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद श्रद्धालुओं को एक QR कोड मिलता है जिसे रास्ते में विभिन्न चेकपोस्ट पर स्कैन किया जाता है। इससे यात्रियों की ट्रैकिंग होती है और किसी भी आपात स्थिति में उन्हें जल्दी सहायता पहुंचाई जा सकती है।
चार धाम यात्रा 2026 की शुरुआत के साथ ही लाखों श्रद्धालु इन पावन धामों के दर्शन के लिए उत्साहित हैं। रजिस्ट्रेशन फीस का यह नया नियम भले ही एक छोटा बदलाव है, लेकिन इससे यात्रा व्यवस्था में सुधार और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा से पहले सरकारी पोर्टल पर नवीनतम जानकारी अवश्य जांच लें।









