Iran Israel War: मध्य-पूर्व में जारी जंग की आग अब भारत के आम आदमी की रसोई तक पहुंच गई है। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया और इसका असर भारत पर इतना गहरा और तेज हुआ कि केंद्र सरकार को एक बेहद कठोर फैसला लेना पड़ा। सरकार ने घरेलू गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता देते हुए पूरे देश में कमर्शियल यानी व्यावसायिक LPG सिलिंडरों की रिफिलिंग पर अनिश्चितकाल के लिए रोक लगा दी है। इस एक फैसले ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया है। मुंबई, बेंगलुरु, पुणे, पंजाब और हिमाचल प्रदेश तक हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। होटल बंद हो रहे हैं, ढाबों पर ताले लग रहे हैं और पुणे में तो हालत इतनी खराब हो गई है कि श्मशान घाट तक बंद करने की नौबत आ गई है।

 

भारत अपनी LPG जरूरत का करीब 55 फीसदी हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से मंगाता है। अकेले कतर से 40 फीसदी आपूर्ति होती थी। जैसे ही यह रास्ता बंद हुआ देश के भीतर मौजूद भंडार पर दबाव एकदम से बढ़ गया। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने भी पुष्टि कर दी है कि कमर्शियल सिलिंडरों की रिफिलिंग रोकने का आदेश केंद्र सरकार की तरफ से आया है और घरेलू उपभोक्ताओं को गैस देना अभी सबसे पहली प्राथमिकता है।

 

Iran Israel War:  पुणे में श्मशान घाट बंद, बेंगलुरु में होटल-रेस्टोरेंट पर लटके ताले

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इस पूरे संकट का सबसे दर्दनाक और चौंकाने वाला असर पुणे से आया है। यहां कमर्शियल LPG की सप्लाई बंद होने के बाद श्मशान घाटों पर काम रुक गया है। आधुनिक श्मशान घाट पूरी तरह गैस आधारित भट्टियों पर चलते हैं और जब कमर्शियल सिलिंडर ही नहीं मिलेंगे तो ये भट्टियां कैसे चलेंगी। परिजन अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार करने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। यह सिर्फ एक आर्थिक समस्या नहीं बल्कि एक इंसानी त्रासदी है। पुणे नगर निगम और श्मशान घाट प्रशासन ने केंद्र और राज्य सरकार से तुरंत दखल देने की मांग की है।

 

देश की आईटी राजधानी बेंगलुरु में हालात किसी से कम नहीं हैं। शहर के सैकड़ों होटल और रेस्टोरेंट मंगलवार से बंद होने लगे हैं। बेंगलुरु में हर रोज लाखों लोग बाहर खाना खाते हैं और ऐसे शहर में जब खाने की जगहें बंद होने लगें तो सोचिए हालत कितनी गंभीर हो जाती है। छोटे ढाबे और सड़क किनारे के फूड स्टॉल तो पहले ही बंद हो चुके हैं। बड़े रेस्टोरेंट पहले से जमा किए हुए स्टॉक से किसी तरह काम चला रहे थे लेकिन अब वह भी खत्म होने के कगार पर है। कर्नाटक होटल एसोसिएशन ने राज्य सरकार को साफ चेतावनी दी है कि अगर 48 घंटे के अंदर गैस सप्लाई नहीं हुई तो पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर प्रतिष्ठान बंद हो जाएंगे।

 

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई भी इस संकट से नहीं बची है। धारावी जैसे इलाकों में जहां छोटे-छोटे उद्योग और खानपान के हजारों केंद्र हैं वहां गैस खत्म होने की खबरें लगातार आ रही हैं। पांच सितारा होटल अभी किसी तरह वैकल्पिक ईंधन का जुगाड़ करके काम चला रहे हैं लेकिन यह न तो सस्ता है और न ही लंबे समय तक चलने वाला। मुंबई के उपनगरों में ढाबों और मिड-रेंज रेस्टोरेंट की हालत सबसे बुरी है। विदर्भ और मराठवाड़ा में भी स्थिति तेजी से बिगड़ रही है।

 

पंजाब के ढाबे बंद, हिमाचल की इंडस्ट्री ठप

 

उत्तर भारत में पंजाब और हिमाचल प्रदेश की हालत भी कुछ अलग नहीं है। पंजाब जो अपने मशहूर ढाबों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, वहां यह संकट सीधे राज्य की पहचान पर वार कर रहा है। देश-विदेश के लाखों पर्यटकों को अपनी तरफ खींचने वाले पंजाब के मशहूर ढाबे अब गैस की कमी से जूझ रहे हैं। लुधियाना और जालंधर के औद्योगिक इलाकों में कमर्शियल सिलिंडरों की रिफिलिंग रुकने से उत्पादन पर सीधा असर पड़ा है। अमृतसर जैसे पर्यटन शहर में होटल इंडस्ट्री भी इसकी चपेट में आ चुकी है।

 

हिमाचल प्रदेश के बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ यानी BBN औद्योगिक क्षेत्र में तो संकट सबसे पहले और सबसे तीखे रूप में सामने आया। यह देश के बड़े औद्योगिक केंद्रों में से एक है जहां फार्मा, पैकेजिंग, फूड प्रोसेसिंग और गत्ता उद्योग में हर रोज हजारों कमर्शियल सिलिंडर खपते हैं। 19 किलो, 47.5 किलो और 425 किलो तीनों साइज के कमर्शियल सिलिंडरों की रिफिलिंग एक साथ बंद होने से यहां के कारखानों में उत्पादन लगभग ठप हो गया है। परवाणू में गैस कंपनियों और डीलरों की इमरजेंसी बैठक भी हुई लेकिन कोई ठोस हल नहीं निकला।

 

Iran Israel War:  होर्मुज बंद होने से 55 फीसदी LPG सप्लाई ठप

 

इस पूरे संकट की जड़ में होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना है। यह दुनिया का सबसे अहम समुद्री रास्ता है और भारत के लिए तो यह एनर्जी लाइफलाइन की तरह है। भारत अपनी LPG जरूरत का करीब 55 फीसदी हिस्सा इसी रास्ते से मंगाता था और कतर से अकेले 40 फीसदी की सप्लाई होती थी। जैसे ही अमेरिका-ईरान जंग के बाद यह रास्ता बंद हुआ भारत की एनर्जी सप्लाई चेन में एक बड़ी दरार पड़ गई।

 

केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को साफ निर्देश दे दिए हैं कि घरेलू उपभोक्ताओं यानी आम घरों में खाना पकाने वाले सिलिंडरों की सप्लाई हर हाल में जारी रहनी चाहिए। इसी वजह से कमर्शियल सेक्टर की बलि चढ़ानी पड़ी। अभी राहत की कोई तय समयसीमा नहीं है। सब कुछ इस बात पर टिका है कि मध्य-पूर्व में जंग कब रुकती है और होर्मुज जलडमरूमध्य कब खुलता है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं और ट्रंप-पुतिन बातचीत में भी ईरान संकट को सुलझाने की कोशिश हुई है लेकिन जब तक वैश्विक सप्लाई सामान्य नहीं होती तब तक भारत में यह संकट बना रहेगा और इसकी मार हर शहर हर गली में महसूस होती रहेगी।