भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में पिछले कुछ सालों से एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां ज्यादातर लोग पेट्रोल और डीजल गाड़ियों को ही पहली पसंद मानते थे, वहीं अब CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों यानी EV की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स भी यही संकेत दे रही हैं कि देश में CNG और EV गाड़ियों की मांग लगातार बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में यह ट्रेंड और मजबूत हो सकता है।

दरअसल, बढ़ती ईंधन कीमतें, कम रनिंग कॉस्ट, बेहतर तकनीक और सरकार की ओर से साफ ऊर्जा को बढ़ावा देने की कोशिशों ने लोगों की सोच बदल दी है। अब खरीदार सिर्फ गाड़ी की कीमत नहीं देखते, बल्कि यह भी सोचते हैं कि उसे चलाने का खर्च कितना आएगा और भविष्य में उसका रखरखाव कितना आसान होगा। 

 

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का असर

CNG और EV की बढ़ती लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह ईंधन की कीमतें मानी जा रही हैं। पिछले कुछ समय में पेट्रोल और डीजल के दामों में उतार-चढ़ाव और बढ़ोतरी ने आम लोगों का बजट प्रभावित किया है।

ऐसे में कई ग्राहक अब ऐसी गाड़ियों की तलाश में हैं जिनका रोजाना का खर्च कम हो। CNG गाड़ियां पेट्रोल के मुकाबले काफी कम खर्च में चलती हैं, जबकि EV में चार्जिंग का खर्च पारंपरिक ईंधन की तुलना में काफी कम पड़ सकता है। यही कारण है कि अब ग्राहक खरीदारी के समय रनिंग कॉस्ट को सबसे ज्यादा महत्व देने लगे हैं। 

 

CNG गाड़ियों की मांग में आया बड़ा उछाल

ऑटो कंपनियों के आंकड़े बताते हैं कि CNG गाड़ियों की मांग में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनियों में शामिल मारुति सुजुकी ने बताया कि हाल के महीनों में CNG वाहनों की बुकिंग में लगभग 40 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

कंपनी ने मई 2026 में CNG वाहनों की रिकॉर्ड बिक्री भी दर्ज की। इसका मतलब साफ है कि ग्राहक अब सिर्फ पेट्रोल कारों पर निर्भर नहीं रहना चाहते और कम खर्च वाले विकल्पों की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। 

 

EV को लेकर भी बढ़ा भरोसा

कुछ साल पहले तक इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं थीं। चार्जिंग स्टेशन की कमी, बैटरी की लाइफ और लंबी दूरी तय करने की चिंता बड़ी वजहें थीं।

लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लगातार बेहतर हो रहा है और कंपनियां नई तकनीक के साथ बेहतर रेंज वाली गाड़ियां बाजार में ला रही हैं। यही वजह है कि EV को लेकर लोगों का भरोसा बढ़ा है और मांग भी तेजी से ऊपर जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ कंपनियों के EV मॉडल की बुकिंग दोगुनी तक हो गई है। 

 

ग्राहक अब सिर्फ कीमत नहीं देख रहे

पहले गाड़ी खरीदते समय ज्यादातर लोग सिर्फ शुरुआती कीमत पर ध्यान देते थे। लेकिन अब सोच बदल चुकी है। ग्राहक यह भी देख रहे हैं कि पांच या दस साल में गाड़ी पर कुल खर्च कितना आएगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक ‘टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप’ यानी गाड़ी खरीदने से लेकर चलाने और मेंटेनेंस तक का कुल खर्च अब खरीदारी का बड़ा आधार बन गया है। CNG और EV इसी वजह से लोगों को ज्यादा आकर्षित कर रहे हैं। 

 

इंफ्रास्ट्रक्चर में भी हुआ सुधार

किसी भी नई तकनीक को सफल बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बेहद जरूरी होता है। CNG के मामले में देशभर में गैस स्टेशन का नेटवर्क तेजी से बढ़ा है। कई रिपोर्ट्स के अनुसार अब 600 से ज्यादा शहरों तक CNG नेटवर्क पहुंच चुका है।

इसी तरह EV चार्जिंग स्टेशनों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। मेट्रो शहरों के अलावा छोटे शहरों और हाईवे पर भी चार्जिंग सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इससे लोगों का भरोसा बढ़ा है और वे इलेक्ट्रिक गाड़ियों को अपनाने के लिए ज्यादा तैयार दिखाई दे रहे हैं। 

 

कंपनियां भी बढ़ा रही हैं विकल्प

एक समय था जब CNG और EV गाड़ियों के विकल्प बेहद सीमित थे। लेकिन अब लगभग हर बड़ी कंपनी इन सेगमेंट्स में नए मॉडल लॉन्च कर रही है।

हैचबैक से लेकर SUV तक और बजट से लेकर प्रीमियम सेगमेंट तक, ग्राहकों के पास पहले से कहीं ज्यादा विकल्प मौजूद हैं। यही कारण है कि अब लोग अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से CNG या EV वाहन चुन पा रहे हैं। 

 

आंकड़े भी बता रहे हैं बदलती तस्वीर

ऑटो सेक्टर के आंकड़े इस बदलाव को साफ दिखाते हैं। वित्त वर्ष 2026 में CNG वाहनों की हिस्सेदारी करीब 22 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि कुछ साल पहले यह काफी कम थी। दूसरी ओर EV की हिस्सेदारी भी लगातार बढ़ रही है।

क्लीन मोबिलिटी यानी CNG, EV और हाइब्रिड वाहनों की संयुक्त हिस्सेदारी अब भारतीय पैसेंजर व्हीकल बाजार के लगभग एक-तिहाई हिस्से तक पहुंच चुकी है। यह बताता है कि ग्राहक तेजी से वैकल्पिक ईंधन वाली गाड़ियों को स्वीकार कर रहे हैं। 

 

पर्यावरण को लेकर भी बढ़ी जागरूकता

आज के समय में लोग सिर्फ पैसे बचाने के बारे में नहीं सोच रहे, बल्कि पर्यावरण को लेकर भी पहले से ज्यादा जागरूक हुए हैं। बड़े शहरों में बढ़ता प्रदूषण लोगों को साफ और टिकाऊ विकल्पों की तरफ आकर्षित कर रहा है। EV को शून्य उत्सर्जन वाला विकल्प माना जाता है, जबकि CNG भी पारंपरिक ईंधन के मुकाबले अपेक्षाकृत साफ ईंधन माना जाता है। यही वजह है कि युवा खरीदारों में इन वाहनों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। 

 

आगे और तेज हो सकती है यह रफ्तार

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में CNG और EV की मांग और तेजी से बढ़ेगी। नए मॉडल, बेहतर तकनीक, बढ़ता इंफ्रास्ट्रक्चर और ईंधन लागत को लेकर चिंता इस बदलाव को और मजबूत बना सकती है। कई बड़ी ऑटो कंपनियां पहले ही आने वाले सालों में कई नए इलेक्ट्रिक मॉडल लॉन्च करने की घोषणा कर चुकी हैं। वहीं CNG सेगमेंट में भी लगातार नए विकल्प जोड़े जा रहे हैं। 

 

हमारी राय

भारतीय ऑटो बाजार एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। लोग अब सिर्फ गाड़ी खरीदने पर नहीं, बल्कि उसे चलाने की कुल लागत पर भी ध्यान दे रहे हैं। यही वजह है कि CNG और EV वाहनों की मांग तेजी से बढ़ रही है। अगर चार्जिंग और CNG इंफ्रास्ट्रक्चर इसी तरह मजबूत होता रहा और कंपनियां बेहतर विकल्प देती रहीं, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल गाड़ियों का दबदबा और कम हो सकता है। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि भारत की सड़कों पर भविष्य की मोबिलिटी की झलक साफ दिखाई देने लगी है।