पूरी दुनिया की नजरें वॉशिंगटन डीसी के व्हाइट हाउस पर टिकी रहीं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के क्रॉस हॉल से राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक ऐतिहासिक दावा किया। उन्होंने घोषणा की है कि ईरान के साथ जारी जंग में अमेरिका को निर्णायक जीत मिली है। ट्रंप के अनुसार, 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) के माध्यम से ईरान की सैन्य कमर तोड़ दी गई है और अब यह युद्ध अपने अंतिम पड़ाव पर है।

 

सैन्य क्षमता का विनाश: “नौसेना और मिसाइल शक्ति खत्म”

 

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में विस्तार से बताया कि पिछले चार हफ्तों के भीषण हमलों में ईरान को कितना नुकसान हुआ है। उन्होंने दावा किया कि:

 

नौसेना का अंत: ईरान की नौसेना अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है।

 

मिसाइल और ड्रोन क्षमता: ईरान की मिसाइलें दागने और ड्रोन उड़ाने की क्षमता को लगभग नष्ट कर दिया गया है।

 

हथियार कारखाने: तेहरान के हथियार बनाने वाले प्रमुख कारखाने और रॉकेट लॉन्चर मलबे में तब्दील हो चुके हैं।

 

ट्रंप ने गर्व से कहा कि दुनिया ने इतिहास में ऐसी "दबदबा बनाने वाली जीत" पहले कभी नहीं देखी होगी। उनके अनुसार, अमेरिका के मुख्य रणनीतिक लक्ष्य अब लगभग पूरे हो चुके हैं।

 

"मिशन खत्म" के लिए 2-3 हफ्तों की समयसीमा

 

वैसे तो ट्रंप ने जीत का ऐलान कर दिया है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान में 'मिशन' को पूरी तरह खत्म करने में अभी 2 से 3 हफ्ते और लग सकते हैं। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि अगर कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका तेहरान को 'पाषाण युग' में वापस भेज देगा।

 

ट्रंप का संदेश स्पष्ट है कि अमेरिका तब तक वहां से नहीं निकलेगा जब तक वह सुनिश्चित नहीं कर लेता कि ईरान अगले कई सालों तक परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में नहीं रहेगा।

 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और सहयोगियों पर तंज

 

इस युद्ध के दौरान एक बड़ा विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर रहा है। ट्रंप ने इस मुद्दे पर अपने सहयोगी देशों, खासकर NATO देशों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने साफ कहा कि होर्मुज को दोबारा खोलने की जिम्मेदारी अब उन देशों की है जो इस रास्ते पर निर्भर हैं।

 

ट्रंप ने दो टूक शब्दों में कहा:

 

• अमेरिका अब अपनी तेल जरूरतों के लिए इस रास्ते पर निर्भर नहीं है, इसलिए इसे खोलने की जिम्मेदारी वह अकेले नहीं लेगा।

 

• उन्होंने उन देशों पर नाराजगी जताई जिन्होंने इस लड़ाई में अमेरिका का साथ नहीं दिया।

 

ईरान में आंतरिक अशांति और मानवाधिकार का मुद्दा

 

संबोधन के दौरान ट्रंप ने ईरान के भीतर चल रहे विरोध प्रदर्शनों का भी जिक्र किया। उन्होंने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि जनवरी से अब तक ईरान के शासन ने लगभग 45,000 प्रदर्शनकारियों की हत्या कर दी है।

 

हालांकि, इस आंकड़े की पुष्टि के लिए अभी तक कोई ठोस वैश्विक सबूत सामने नहीं आए हैं, लेकिन ट्रंप इसे ईरान की क्रूरता के प्रमाण के रूप में पेश कर रहे हैं।

 

परमाणु मुक्त ईरान का संकल्प

 

ट्रंप ने दोहराया कि उनका सबसे बड़ा उद्देश्य ईरान को कभी भी परमाणु शक्ति नहीं बनने देना है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति ओबामा के समय हुए 2015 के परमाणु समझौते की फिर से आलोचना की और कहा कि अगर वह समझौता चलता रहता, तो आज इजराइल और मिडिल ईस्ट का अस्तित्व ही नहीं होता।

 

ईरान के भीतर गृहयुद्ध जैसी स्थिति?

 

ईरान-इजराइल युद्ध और आंतरिक विद्रोह के कारण इस समय खाड़ी क्षेत्र में स्थिति अत्यंत विस्फोटक बनी हुई है। एक तरफ जहां इजराइली वायुसेना और अमेरिकी 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' ने ईरान के सैन्य ठिकानों, मिसाइल डिपो और परमाणु केंद्रों को भारी नुकसान पहुंचाया है, वहीं ईरान के भीतर भी शासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर सशस्त्र विद्रोह शुरू हो गया है। राष्ट्रपति ट्रंप के दावों के अनुसार, वहां प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई हिंसक कार्रवाई में हजारों लोग मारे गए हैं, जिससे देश गृहयुद्ध की कगार पर खड़ा है।

 

इजराइल पर भी ईरान के जवाबी मिसाइल हमलों का गहरा असर पड़ा है, जिससे वहां की अर्थव्यवस्था और सैन्य संसाधनों पर भारी दबाव है। इस तनाव का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ा है, जिसके बंद होने के खतरे ने भारत सहित पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।

 

भारत के लिए वहां फंसे लाखों प्रवासियों की सुरक्षा और तेल की बढ़ती कीमतें सबसे बड़ी चुनौती हैं। अगर अगले 2-3 हफ्तों में ट्रंप की शर्तों पर सीजफायर नहीं होता, तो यह संघर्ष पूरे मध्य पूर्व को एक ऐसे विनाशकारी युद्ध में झोंक सकता है जिससे उबरने में दशकों लग जाएंगे।

 

अब तक कितना हुआ नुकसान?

 

फरवरी और मार्च 2026 के बीच ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते विवाद और सैन्य गतिविधियों के चलते भारी नुकसान हुआ है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अब तक की झड़पों के परिणामस्वरूप ईरान में एक हजार से अधिक लोग मारे गए हैं, इज़राइल के आधार ढांचे को गंभीर हानि पहुंची है, और क्षेत्रीय अस्थिरता के चलते तेल की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।

 

मीडिया रिपोर्टस् के अनुसार, युद्ध के प्रारंभिक चरणों में ईरान में एक हजार से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में 1,300 से लेकर 5,000 से अधिक लोगों के मारे जाने की बात कही गई है….वहीं कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान में 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा ईरानी हमलों में अमेरिकी सैनिकों की मौत की भी खबरें आई हैं।

 

इज़राइली हमलों ने ईरान के परमाणु और सैन्य स्थलों को काफी क्षति पहुंचाई है। दूसरी ओर, ईरानी मिसाइलों ने इज़राइल के तेल अवीव में सैन्य ठिकानों और नागरिक ढांचों को लक्ष्य बनाया है। ईरान द्वारा होर्मुज जलसंधि को अवरुद्ध करने का परिणाम विश्वभर में तेल की आपूर्ति में खतरों के रूप में आया है और ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई है। इस तनाव के चलते लेबनान, जॉर्डन और अन्य खाड़ी देशों में भी हताहतों की रिपोर्ट्स आई हैं।

 

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह संबोधन एक नए विश्व व्यवस्था की ओर संकेत करता है, जहाँ अमेरिका 'अधिकतम दबाव' की नीति के जरिए अपने दुश्मनों को घुटनों पर लाने का दावा कर रहा है। आने वाले 21 दिन बहुत महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि यह तय करेंगे कि ईरान पूरी तरह आत्मसमर्पण करता है या यह संघर्ष किसी और विनाशकारी मोड़ की ओर मुड़ता है।