हर साल इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने के दौरान ज्यादातर लोग Form 16 देखकर ही रिटर्न फाइल कर देते हैं। लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स लगातार यह सलाह देते हैं कि ITR भरने से पहले Form 26AS, AIS और अन्य टैक्स रिकॉर्ड को भी जरूर चेक करना चाहिए। इसकी वजह यह है कि अगर आपके Form 26AS में कोई गड़बड़ी, गलत एंट्री या मिसमैच है और आपने बिना जांचे रिटर्न फाइल कर दिया, तो बाद में इनकम टैक्स विभाग की ओर से नोटिस आ सकता है। 

आज के समय में टैक्स विभाग के पास पहले से ही आपकी आय, TDS, बैंक ब्याज और कई वित्तीय लेन-देन की जानकारी मौजूद रहती है। ऐसे में यदि आपके द्वारा दाखिल ITR और विभाग के रिकॉर्ड में अंतर मिलता है तो सिस्टम उसे तुरंत पकड़ लेता है। इसलिए Form 26AS को समझना और उसमें मौजूद जानकारी को वेरिफाई करना बेहद जरूरी हो गया है। 

 

आखिर क्या होता है Form 26AS?

सरल भाषा में कहें तो Form 26AS आपके टैक्स का रिपोर्ट कार्ड है। इसमें आपके PAN से जुड़ी टैक्स संबंधी जानकारी दर्ज होती है। इसमें यह दिखता है कि आपकी सैलरी या अन्य आय पर कितना TDS काटा गया, सरकार के खाते में कितना टैक्स जमा हुआ, आपने कोई एडवांस टैक्स या सेल्फ असेसमेंट टैक्स जमा किया है या नहीं और कुछ हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन की जानकारी भी इसमें दर्ज होती है। 

जब आप ITR भरते हैं तो टैक्स विभाग आपके रिटर्न का मिलान Form 26AS और AIS में मौजूद डेटा से करता है। यही वजह है कि इसमें मौजूद किसी भी गलती को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

 

Form 26AS में किस तरह की गलतियां देखने को मिलती हैं?

कई बार कर्मचारी की सैलरी से TDS तो कट जाता है लेकिन वह Form 26AS में दिखाई नहीं देता। कुछ मामलों में नियोक्ता या बैंक गलत PAN नंबर दर्ज कर देते हैं, जिससे टैक्स क्रेडिट किसी दूसरे व्यक्ति के खाते में चला जाता है। इसके अलावा AIS या Form 26AS में डुप्लीकेट एंट्री, गलत ट्रांजैक्शन या ऐसी जानकारी भी दिखाई दे सकती है जो वास्तव में आपकी नहीं होती। कुछ लोगों को यह भी शिकायत रहती है कि Form 16 में दिखाई गई आय और Form 26AS में दर्ज आय अलग-अलग होती है। अगर इस तरह के अंतर को समय रहते ठीक नहीं कराया गया तो रिफंड अटक सकता है या फिर अतिरिक्त टैक्स डिमांड भी आ सकती है। 

 

गलतियां मिलने पर क्या हो सकता है नुकसान?

बहुत से लोग सोचते हैं कि छोटी-मोटी गलती से कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। यदि आपने ऐसा TDS क्लेम कर लिया जो Form 26AS में दिखाई नहीं दे रहा है या आपकी आय का आंकड़ा विभाग के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता है, तो ITR प्रोसेसिंग के दौरान समस्या आ सकती है। ऐसी स्थिति में टैक्स रिफंड में देरी हो सकती है, अतिरिक्त टैक्स की मांग आ सकती है या फिर विभाग स्पष्टीकरण मांगने के लिए नोटिस भेज सकता है। कई मामलों में रिटर्न को डिफेक्टिव भी घोषित किया जा सकता है। इसलिए रिटर्न फाइल करने से पहले सभी आंकड़ों का मिलान करना बेहद जरूरी है। 

 

Form 26AS में गलती दिखे तो सबसे पहले क्या करें?

यदि आपको Form 26AS में कोई गड़बड़ी नजर आती है तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले अपने Form 16, सैलरी स्लिप, बैंक स्टेटमेंट और AIS के साथ उसका मिलान करें। इससे आपको समझ आएगा कि गलती वास्तव में कहां है और कितनी बड़ी है। कई बार तकनीकी कारणों से डेटा अपडेट होने में समय लगता है। इसलिए यह सुनिश्चित कर लें कि जो जानकारी आप देख रहे हैं वह वास्तव में गलत है या केवल अपडेट होने का इंतजार कर रही है।

 

TDS से जुड़ी गलती कैसे ठीक कराएं?

अगर समस्या TDS से जुड़ी है तो उसका सुधार सीधे टैक्सपेयर नहीं कर सकता। इसके लिए उस संस्था से संपर्क करना होगा जिसने TDS काटा था। यह आपका एम्प्लॉयर, बैंक या कोई अन्य संस्था हो सकती है। उन्हें अपनी TDS रिटर्न संशोधित करने के लिए कहना होगा। जब संबंधित संस्था संशोधित विवरण जमा कर देगी, तब कुछ समय बाद सही जानकारी Form 26AS में दिखाई देने लगेगी। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे मामलों में ईमेल के माध्यम से संपर्क करना बेहतर होता है ताकि आपके पास रिकॉर्ड भी रहे। 

 

AIS में गलत जानकारी हो तो क्या करें?

यदि गड़बड़ी AIS में दिखाई दे रही है तो इनकम टैक्स पोर्टल पर उपलब्ध फीडबैक सुविधा का उपयोग किया जा सकता है। वहां जाकर आप किसी ट्रांजैक्शन को सही, आंशिक रूप से सही या पूरी तरह गलत बता सकते हैं। इस प्रक्रिया के बाद संबंधित जानकारी की समीक्षा की जाती है और जरूरत पड़ने पर रिकॉर्ड अपडेट किया जाता है। इसलिए AIS में दिख रही किसी भी संदिग्ध एंट्री को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 

 

क्या गलती होने पर ITR फाइल करना टाल देना चाहिए?

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल इसलिए ITR फाइलिंग को टालना सही नहीं है क्योंकि किसी दस्तावेज में मामूली गड़बड़ी दिखाई दे रही है। अगर आपके पास सही दस्तावेज और पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं तो वास्तविक आय और टैक्स के आधार पर रिटर्न दाखिल किया जा सकता है। हालांकि यह जरूरी है कि आपने संबंधित संस्था को सुधार के लिए सूचित किया हो और सभी जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखे हों। भविष्य में अगर विभाग कोई स्पष्टीकरण मांगता है तो यही दस्तावेज आपके काम आएंगे। 

 

ITR भरने से पहले इन दस्तावेजों का जरूर करें मिलान

केवल Form 16 पर निर्भर रहने की बजाय Form 26AS, AIS और TIS को भी जरूर जांचना चाहिए। इन सभी दस्तावेजों में मौजूद जानकारी का आपस में मिलान करने से अधिकांश गलतियां पहले ही पकड़ में आ जाती हैं। अगर आपकी सैलरी, बैंक ब्याज, निवेश से हुई कमाई या TDS की जानकारी सभी दस्तावेजों में एक जैसी दिखाई दे रही है, तो आपका ITR बिना किसी परेशानी के प्रोसेस होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। 

 

हमारी राय

आज के डिजिटल दौर में इनकम टैक्स विभाग के पास लगभग हर वित्तीय जानकारी पहुंच रही है। ऐसे में जल्दबाजी में ITR भरना बाद में परेशानी का कारण बन सकता है। हमारी राय है कि रिटर्न फाइल करने से पहले कम से कम एक बार Form 26AS, AIS, Form 16 और बैंक रिकॉर्ड का मिलान जरूर करें। अगर कोई गलती दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज न करें और तुरंत सुधार की प्रक्रिया शुरू करें। कुछ मिनट की यह सावधानी आपको नोटिस, रिफंड में देरी और अनावश्यक टैक्स विवाद से बचा सकती है। इसलिए ITR फाइलिंग में जल्दबाजी नहीं, बल्कि सही जानकारी के साथ समझदारी दिखाना सबसे बेहतर ऑप्शन है।