ज्यादातर लोग महाभारत के बारे में जानते हैं या फिर किसी ने कभी न कभी महाभारत के युद्ध के बारे में सुना जरूर होगा। आज हम आपको उसी महाभारत के कुछ ऐसे पात्र के बारे में बताएंगे जो युद्ध में तो हार गए लेकिन उन्होंने आज के जमाने को बहुत कुछ सीखा दिया। जी हां, भले ही महाभारत का युद्ध 5000 साल पहले लड़ा गया है लेकिन उस युद्ध के कुछ पात्रों से हम ऐसे कई चीजें सीख सकते हैं जो आज के जमाने में भी प्रभावी है। चलिए आज हम आपको महाभारत के कुछ अनछुए पहलुओं के बारे में विस्तार से बताते हैं।
आज हम महाभारत के उन नायकों के बारे में चर्चा करेंगे जिनकी चर्चा हारे हुए व्यक्तियों में होती है, लेकिन सच तो ये है कि इन्होंने नए युग को बहुत कुछ सिखाया है। हम इनसे कई चीजें सीख सकते हैं इसलिए इनके जीवन के बारे में जानना उतना ही जरूरी है जितना महाभारत के प्रमुख किरदारों के बारे में हम जानना चाहते हैं। आइए आज हम आपको महाभारत के कुछ अनछुए पहलुओं के बारे में विस्तार से बताएंगे।
दरअसल, बचपन से लेकर आज तक महाभारत को अकसर जीत और हार के पहलुओं में तौलकर देखा जाता रहा है। लोग कहते हैं कि पांडव जीते तो कौरव हार गए...यहीं तो है महाभारत। जी नहीं...इन सबसे दूर महाभारत की एक और अनछुई कहानी है। इतिहास बहुत बड़ा है जिस पर चर्चा करना बेहद जरूरी है। महाभारत सिर्फ विजेताओं की कहानी मात्र नहीं है...जीवन की अलग-अलग पहलुओं को जीने का सार बताती है। यदि गहराई से महाभारत की कहानी को समझा जाए तो ये कहानी उन लोगों की है जो हार गए, टूट गए, चुप रह गए या अंत में मार दिए गए। लेकिन, इनकी सोच और संघर्ष की कहानी आज दुनिया के लिए बहुत मायने रखती है।
आज आपको हम उन नायकों की कहानी बताएंगे जो सत्ता हासिल नहीं कर पाए लेकिन समाज, राजनीति और इंसानियत को आईना दिखा गए।
कर्ण
सबसे पहला नाम कुंती पुत्र कर्ण का आता है। कण को अकसर लोग दानवीर कर्ण के नाम से जानते हैं। उनकी हार रणभूमि से तो थी ही लेकिन सबसे बड़ी हार उस सामाजिक व्यवस्था से थी जिसने जन्म के आधार पर कर्ण की योग्यता को नकार दिया।
कर्म प्रभावशाली, मेहनती का प्रतीक है लेकिन सही मंच, पहचान और अवसर से वंचित किरदार भी। कर्ण की सबसे बड़ी कमी थी कि वो गलत पक्ष के साथ ईमानदारी से खड़ा था। अंत तक ईमानदारी पूर्वक जीते हुए उसने अपने प्राण त्याग दिए। उसने दिल से दोस्ती निभाई जिसके बदले में सम्मान चाहा लेकिन यहीं उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गई। आज जब हम मेरिट, रिजर्वेशन, नेपोटिज्म और अवसरों की बात करते हैं तो कर्ण की कहानी ज्यादा प्रासंगिक लगती है।
भीष्म
महाभारत के दूसरे नायक भीष्म हैं जिसने एक प्रतिज्ञा पूरी जिंदगी भर निभाई। इस दौरान चाहे उसके साथ कितना भी अन्याय क्यों न हुआ हो उसने अपना वचन सर्वोपरि रखा। जब द्रोपदी का अपमान हो रहा था तो भी उनकी प्रतीज्ञा सर्वोपरि थी जिस वजह से वो वहां भी चुप रह गए। भीष्म आज के उस वर्ग की कहानी बताते हैं जो गलत होते देखता रहता है लेकिन कुछ नहीं बोलता। उसे फर्क पड़ता तो है लेकिन कुछ नहीं बोलता...मानसिक और शारीरिक रूप से तकलीफ झेलता रहता है लेकिन कुछ भी नहीं करता। वो खुद के लिए और दूसरों को इंसाफ दिलाने के लिए आवाज नहीं उठा पाता। ऐसे में ये आज के युग के लिए सबसे बड़ा सवाल छोड़ गए कि क्या हर प्रतिज्ञा, हर नियम नैतिक होता है ?
विदुर
महाभारत के अगले नायक के तौर पर हम बात कर रहे हैं विदुर की। महाभारत में विदुर सबसे विवेकशील पात्र था। उसने युद्ध से पहले बार-बार धृतराष्ट्र और कौरवों को चेताया कि युद्ध न ही हो तो अच्छा है। अगर उनकी बातों को गंभीरता से लिया जाता तो एक बड़ा युद्ध टल जाता लेकिन किसी ने भी उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया।
आज के युग में ये पात्र उन लोगों के लिए है जो हर किसी को आने वाले कल के लिए चेताता रहता है लेकिन दुनिया उसे अनसुना कर देती है। अगर महाभारत में नैतिकता की बात करें तो विदुर सबसे पहले नंबर पर खड़े प्रतीत होते हैं।

Image Credit: Prasar Bharti
युधिष्ठिर
महाभारत के अगले नायक के तौर पर हम बात कर रहे हैं युधिष्ठिर की। एक ऐसा राजा जिसे सच बोलने की कीमत चुकानी पड़ी। युधिष्ठिर को महाभारत में धर्मराज भी कहा गया है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी कमजोरी थी जुआ और सच बोलने की जिद। उन्होंने जुए में सब कुछ खो दिया, यहां तक कि अपनी पत्नी को भी दांव पर लगा दिया। ये किरदार हमें सिखाता है कि कभी-कभी सच और नैतिकता विवेक के बिना विनाशकारी रूप धारण कर लेती है। हमें इससे बचना चाहिए।
द्रौपदी
महाभारत की अगले नायिका के तौर पर हम द्रौपदी की बात करेंगे। उन्हें महाभारत में हर बार पीड़िता के रूप में देखा गया। लेकिन पर्दे के पीछे द्रौपदी महाभारत की सबसे शक्तिशाली आवाज थी। उसने जब सभा में अपने सवालों की बौछार की तो हर एक सवाल सभा में बैठे लोगों को विचलित करने लगी। उनकी अपमानजनक हार ने महाभारत की नींव रखी। आज के नए युग में द्रौपदी उन महिलाओं के समूह का प्रतीक है जिसे हर बार दबाया जाता है। द्रौपदी जब सभा में हारी तो ये हार सिर्फ उसकी हार नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की सबसे बड़ी हार थी।
अभिमन्यु
महाभारत के अगले नायक के तौर पर हम बात कर रहे हैं अभिमन्यु की। जब अभिमन्यु को चक्रव्यूह में भेजा गया तो पूरा ज्ञान नहीं होने के कारण वो हार गया। ये युद्ध की सबसे दर्दनाक हारों में से एक थी। आधुनिक युग में अभिमन्यु उन युवाओं की कहानी है जिनके ऊपर जिम्मेदारी तो दे दी जाती है लेकिन मार्गदर्शन के बिना वो कैसे जिम्मेदारी संभालेगा, इस अहम पहलू को समझने के लिए अभिमन्यु से प्रेरणा लेना बेहद जरूरी है।
इन सभी नायकों से मिलकर पूर्ण होता है महाभारत
सही मायने में देखें तो महाभारत की कथा युद्ध के दौरान हार और जीत का कहानी मात्र नहीं है। ये हमें जीवन जीने का सही तरीका समझाती है। महाभारत का हर एक कैरेक्टर हमें आधुनिक युग की झलक दिखाता है। अगर हमें अपनी जिंदगी सही मायने में जीनी है तो इन महानायकों से प्रेरणा जरूरी लेनी चाहिए।









