नए दौर में धर्म को लेकर बड़े बदलाव आए हैं। दान-पुण्य से लेकर भक्ति तक, कुंडली परामर्श से लेकर विवाह लग्न तय करना...आजकल सब कुछ ऑनलाइन मौजूद है। ऐसे में समय की बहुत बचत भी होती है। लेकिन इस नए दौर की क्या चुनौतियां हैं ? एक वक्त था जब मंदिर-मस्जिद धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र हुआ करते थे लेकिन अब लोगों के पास इतना समय कहां कि हर रोज मंदिर-मस्जिद, पूजा-अर्चना करने जाए। ऐसे में डिजिटल भक्ति इनके लिए बेस्ट विकल्प है। समय और पैसे की बचत के साथ ये ज्यादा सुविधाजनक भी है। पुराने जमाने के लोगों के लिए इस बदलाव को अपनाना थोड़ा मुश्किल है लेकिन नए जमाने के लोग इस बदलाव की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। आज के युग में ये धर्म को लेकर बड़े बदलावों में से एक है। आज धर्म मोबाइल स्क्रीन पर है, आस्था लाइव स्ट्रीम में और दान QR कोड से किया जा रहा है। सवाल ये नहीं है कि धर्म बदल रहा है लेकिन ये जरूर बड़ा सवाल है कि नए दौर में धर्म कैसे ढल रहा है और इसका समाज पर क्या असर पड़ रहा है? आज इस आर्टिकल में हम इसी पर चर्चा करेंगे।
क्या ऑनलाइन दर्शन से सच्ची आस्था मुमकिन है ?
आज लोग मंदिर-मस्जिद जाने पर जोर न देकर घर पर ही सुबह-सुबह मंदिर से लाइव स्ट्रीमिंग देखकर भगवान के दर्शन करते हैं। लोगों की व्यस्त दिनचर्या के कारण ऑनलाइन दर्शन और पूजा का चलन तेजी से बढ़ा है। अब धीरे-धीरे ऑनलाइन दर्शन और आस्था स्थाई रूप लेती जा रही है। कई लोगों के लिए ये एक सामान्य दिनचर्या का हिस्सा बन गई है। यूट्यूब, फेसबुक और ऐप्स के माध्यम से मंगला, संध्या आरती, कथा वाचन और प्रवचन का चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है। ऐसे में ये ऑनलाइन व्यवस्था हमारी आदत में शुमार हो चुकी है।
कोरोना काल में ऑनलाइन दर्शन हुआ ट्रेंड
इस बात से नकारा नहीं जा सकता कि जब कोरोना में घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी तो यहीं ऑनलाइन सुविधा हमारी जिंदगी को सरल बनाती थी। मोबाइल में बस एक क्लिक और फिर ऑनलाइन दर्शन और पूजा शुरू हो जाती थी। इसने लोगों को एक-दूसरे से जोड़ा और लोगों को आस्था से भी बांधे रखने में ऑनलाइन दर्शन और पूजा-अर्चना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस वक्त अगर ये सुविधा नहीं होती तो शायद धर्म का प्रचार नहीं होता, ऑनलाइन दान नहीं होते तो ढेर सारे धार्मिक समूहों द्वारा कोरोना में मदद राशि जो डोनेट की गई...उसकी व्यवस्था भी आखिर कहां से होती? ऐसे में इस बात से नकारा नहीं जा सकता है कि आज के युग में ऑनलाइन दर्शन और भक्ति सिर्फ आदत नहीं बल्कि जरूरत है।
जरा सोचिए...आप एक ऐसी कंपनी में काम करते हैं जहां आपको ज्यादा छुट्टी नहीं दी जाती। ऐसे में आप हर बार मंदिर-मस्जिद जाकर दर्शन करने के बारे में नहीं सोच सकते। लेकिन ऑनलाइन दर्शन से ये मुमकिन है कि आप भगवान से कनेक्टेड रहें। बड़े मंदिरों से लेकर स्थानीय धार्मिक आयोजनों तक आज सब कुछ ऑनलाइन है। ये उन लोगों के लिए बेहद जरूरी विकल्प है जो बुजुर्ग हैं और चलकर मंदिर-मस्जिद में दर्शन करने में असमर्थ। यहीं कारण है कि आज ऑनलाइन दर्शन और पूजा-अर्चना बढ़ती जा रही है।
क्या ऑनलाइन दर्शन के दौरान आस्था उतनी ही गहरी है?

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अगर ऑनलाइन दर्शन लाभदायक है तो सबसे बड़ा सवाल है कि क्या इस दौरान आस्था उतनी ही गहरी है जितनी ऑफलाइन दर्शन के दौरान होती थी? सच तो ये है कि दर्शन, दान-पुण्य और पूजा-अर्चना सब कुछ आध्यात्म से जुड़ा है। हमारे मन और मस्तिष्क को शांत करता है। ये भी बात सच है कि हम जैसा सोचेंगे वैसा ही महसूस करेंगे। यदि ऑनलाइन दर्शन हमारी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन गई है तो कहने में कोई शक नहीं है कि आप ऑनलाइन दर्शन के दौरान उतनी ही श्रद्धा से पूजा करते होंगे जितनी श्रद्धा से मंदिर में। दूसरी ओर, इस बात से नकारा भी नहीं जा सकता कि ऑफलाइन दर्शन के दौरान जब आप मंदिर-मस्जिद या किसी अन्य धार्मिक स्थल में होते हैं तो आपको उस जगह की सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। आज की जरूरत को पूरा करने के लिए ऑनलाइन दर्शन एक आवश्यक माध्यम जरूर है लेकिन धार्मिक स्थल पर जाकर परिवार के साथ दर्शन करना एक अलग बात हो जाती है।
ऑनलाइन दान-पुण्य और स्कैम
किसी ने सच ही कहा है कि जिस चीज के फायदें होते हैं उस चीज के कहीं न कहीं नुकसान भी होते हैं। ऑनलाइन दर्शन को भी हम ऐसे ही देखते हैं। आजकल सोशल मीडिया पर ऑनलाइन दान-पुण्य करने को कहा जाता है। ऑनलाइन आपको मैसेज आता है कि मैं आपकी कुंडली देखूंगा...आप अपना डेट ऑफ बर्थ बताएं। जब आप उसे अपना डेट ऑफ बर्थ बताते हैं तो वो एक कुंडली ऑनलाइन बनाकर दे देता है और फिर आपसे ढेर सारे पैसों की डिमांड करने लगता है। ऐसे में आपको इन सब चीदों से सावधान रहने की जरूरत है।
ऑनलाइन दर्शन से मिल रहा लोगों को रोजगार
Astrotalk और अन्य ऐप जो कुंडली बताते हैं, इन कंपनियों के माध्यम से कइयों को रोजगार के अवसर भी मिलते हैं। ऐसे में आप कह सकते हैं ऑनलाइन दर्शन के कई फायदे हैं। लेकिन फिर भी आपको इसका उपयोग करनेसे पहले सावधानी भी बरतनी चाहिए। इस बात से भी नकारा नहीं जा सकता कि अब ऑनलाइन दर्श और दान-पुण्य...कुंडली मिलान आदि में एआई की भूमिका अहम होती जा रही है। इस मुद्दे पर रिसर्च करने की जरूरत है कि ऑनलाइन धर्म के प्रचार में एआई का प्रयोग कितना लाभदायक और नुकसानदेह है।









