Gen-Z यानी आज की युवा पीढ़ी। हर कोई जानना चाहता है कि ये लोग कैसे सोचते हैं, खासकर जब बात धर्म की आए तो Gen-Z का ओपिनियन बहुत मैटर करता है क्योंकि यहीं ओपिनियन हमारे भावी पीढ़ी की सोच निर्धारित करता है। आज दुनियाभर में जहां एक ओर धर्म को लेकर लड़ाई-झगड़े हो रहे हैं। कहीं हिंदू-मुस्लिम तो कहीं सिख-ईसाई। ऐसे समय में एक Gen-Z की क्या सोच है...। क्या वो भी धर्म के नाम पर लड़ने का समर्थन करता है या फिर उसकी सोच कुछ और ही है। आज हम इस आर्टिकल में यहीं जानने की कोशिश करेंगे कि आज की युवा पीढ़ी की नई सोच क्या कहती है। इनकी सोच किस तरह भारत की भावी पीढ़ी की नींव रखने वाली है...ये सारी चीजें आज हम इस आर्टिकल में जानने की कोशिश करेंगे। 

 

Gen-Z आध्यात्म की ओर बढ़ रही

 

आज की डिजिटल युग की युवा पीढ़ी खुद की आध्यात्मिक पहचान बना रही है। सबसे पहले तो जानते हैं कि दुनिया में Gen-Z बोलते किसको हैं। दरअसल, Gen-Z मतलब वे लोग जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है। ये पीढ़ी तकनीक और सोशल मीडिया के बीच पली बढ़ी। इनके पूजा करने के तरीके,  धर्म को अपनाने का तरीका बाकियों से बिल्कुल अलग है। ये धर्म को लेकर बिल्कुल अलग सोचते हैं। इनके लिए धर्म और आध्यात्म दोनों अलग चीज है। पहले  के समय में धर्म मुख्यत: परिवार या समाज के नियमों और परंपराओं तक सीमित थे लेकिन अब Gen-Z ने इस परिभाषा को बदल दिया है। इनके लिए धर्म एक व्यक्तिगत अनुभव है और वो इसे डिजिटल माध्यम और सामाजिक मूल्यों के आधार पर अपनाती है। 

 

क्या है Gen-Z के लिए धर्म के मायने 

 

Gen-Z के लिए धर्म अब केवल पूजा-पद्धति या धार्मिक कानून भर नहीं है बल्कि ये इन सब से ऊपर है। वे इसे व्यक्तिगत रूप से जीवन के नैतिक और मानसिक संतुलन का साधन मानते हैं। ये सिर्फ और सिर्फ आज के दौर में डिजिटल परिवर्तन और बढ़ती व्यक्तिगत स्वतंत्रता का परिणाम है। ये नियमों और परंपराओं तक सीमित नहीं रहते बल्कि धर्म को अनुभव करते हैं। वे इसे जीवन को संतुलित करने का तरीका मानते हैं। पहले के समय में हिंदू और बौद्ध धर्म में योग और ध्यान पर विशेष फोकस था। आज भी योग और ध्यान Gen-Z के बीच बेहद पॉपुलर हैं। सभी धर्मों में प्रेयर ऐप और मेडिटेशन ऐप के माध्यम से ये प्रार्थना को डिजिटल रूप दे रहे हैं। Gen-Z आज धर्म के संदेश और सीख पर अधिक धअयान देते हैं न कि केवल पारंपरिक प्रथाओं पर टिके रहते हैं।

 

                                                                             Image Credit : Canva 

इस दौरान Gen-Z पर डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया का प्रभाव भी खूब हुआ है। इनके लिए सोशल मीडिया आध्यात्म का एक बड़ा साधन है। TikTok, Instagram और YouTube पर धर्म और आध्यात्म से जुड़े वीडियो देखना पसंद करते हैं। डिजिटल रूप से मेडिटेशन करना पसंद करते हैं, जिसमें वे YouTube पर कई गुरुओं की साधना करते हुए मेडिटेशन करते हैं। आध्यात्म की बातें सीखते हैं। इतना ही नहीं वो धार्मिक परामर्श के लिए भी काफी हद तक डिजिटल डिवाइस पर टिके हैं। अब Gen-Z धर्म को समझने के लिए एआई का सहारा भी लेने लगा है। Gen-Z का एआई से भरोसा बेहद अटूट होता जा रहा है। तभी तो एस्ट्रोटॉक जैसे कई ऐप हैं जो एआई आधारित कुंडली मिलान और राशिफल जैसी सुविधा उपलब्ध कराने लगे हैं। दफ्तर से लेकर धर्म इन सभी क्षेत्रों में Gen-Z एआई को मान्यता देने लगे हैं। ऑनलाइन पॉडकास्ट और धर्म पर चर्चा ने पारंपरिक धार्मिक संस्थानों की भूमिका काफी हद तक बदल दिया है। इतना ही नहीं आज Gen-Z Discord, Reddit और अन्य ऑनलाइन कम्युनिटी प्लेटफ़ॉर्म्स में धर्म के बारे में सुनना पसंद करते हैं। 

 

कैसा है Gen-Z का स्पिरिचुअल एप्रोच 

 

आज Gen-Z अलग-अलग धर्मों का मिश्रण करती है। इनमें से अधिकतर ये मानते हैं कि सभी धर्म एक समान है। वे हिंदू-मुस्लिम में भेदभाव करना नहीं जानते न ही लड़ाई-झगड़ा। उनके लिए धर्म एक मानसित शांति है न कि किसी को ठेस पहुंचाना। वे धर्म को पवित्रता के तौर पर ही देखते हैं और अपनाते हैं। जैसे- बौद्ध धर्म और हिंदू ध्यान इनका कॉम्बिनेशन मिलकर एक Gen-Z के लिए धर्म का निर्माण करता है। इनकी सोच ऐसी है कि यदि सिख में कुछ चीजें इन्हें अच्छई लगी तो ये उसे अडॉप्ट कर लेंगे उसी तरह इस्लाम, हिंदू, बौद्ध आदि धर्मों का भी एक मिश्रण बना देते हैं और जिस भी चीज से इन्हें मानसिक शांति मिलती है उसी धार्मिक प्रक्रिया को फॉलो करते हैं। Gen-Z स्थिर संस्थागत नियमों से हटकर, अनुभव और मानसिक संतुलन पर आधारित मानती है।

 

Gen-Z सामाजिक न्याय, समानता को अच्छी तरह समझते हैं। वे सामाजिक और नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देना पसंद करते हैं। ये लिंग समानता, LGBTQ+ acceptance को सपोर्ट करने की बात करते हैं। ये उन चीजों की बात करते हैं जो इससे पहले तक अनछुई हैं, ये नई शुरुआत की बात करते हैं, ये सभी के बीच समानता की बात करते हैं...ये सभी लोगों के हक की बात करना पसंद करते हैं। कुल मिलाकर Gen-Z  के लिए इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। इनके लिए धार्मिक परंपरा की तुलना में सच्चाई, इंसानियत और लोगों की सेवा करना ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

 

मेंटल हेल्थ और सेल्फ केयर को देते हैं प्राथमिकता 

 

Gen-Z मेंटल हेल्थ और  सेल्फ केयर को हमेशा प्राथमिकता देते हैं। वे प्रार्थना और मेडिटेशन को स्ट्रेस मैनेजमेंट और इमोशनल वेल बीइंग के लिए अपनाते हैं। डिजिटल ऐप या ऑनलाइन स्पिरिचुअल कम्युनिटी के जरिए अवसाद कम करने की कोशिश करते हैं। ये बेहद अच्छी तरह समझते हैं कि बिजी शेड्यूल के साथ धर्म को साथ लेकर कैसे चलना है।