दुनियाभर में पिछले कुछ वर्षों से एक सवाल लगातार चर्चा में है कि आखिर जन्म दर यानी बर्थ रेट इतनी तेजी से क्यों घट रही है। पहले माना जाता था कि बढ़ती महंगाई, करियर का दबाव, शादी में देरी और बदलती जीवनशैली इसकी बड़ी वजह हैं। लेकिन अब एक नई रिसर्च ने इस बहस में एक बिल्कुल अलग एंगल जोड़ दिया है।

हाल ही में सामने आई एक स्टडी में दावा किया गया है कि iPhone और स्मार्टफोन क्रांति का भी जन्म दर में गिरावट से संबंध हो सकता है। सुनने में यह बात अजीब लग सकती है, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि 2007 में iPhone लॉन्च होने के बाद लोगों के व्यवहार और सामाजिक जीवन में जो बड़े बदलाव आए, उनका असर जन्म दर पर भी पड़ा हो सकता है। 

 

आखिर रिसर्च में कहा क्या गया है?

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में 1980 से 2007 तक प्रजनन दर यानी फर्टिलिटी रेट अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई थी। लेकिन 2007 के बाद इसमें लगातार गिरावट देखने को मिली। शोधकर्ताओं ने पाया कि 2024 तक अमेरिका की सामान्य जन्म दर में करीब 22 प्रतिशत की कमी आ चुकी थी। 

शोध में यह समझने की कोशिश की गई कि आखिर ऐसा क्या हुआ जिसने इस गिरावट को तेज कर दिया। इसी दौरान शोधकर्ताओं का ध्यान iPhone और स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल की तरफ गया। उन्होंने पाया कि जिन इलाकों में iPhone और मोबाइल ब्रॉडबैंड की पहुंच पहले हुई, वहां जन्म दर में गिरावट भी अपेक्षाकृत ज्यादा देखने को मिली। 

 

2007 में क्या बदल गया था?

साल 2007 सिर्फ iPhone लॉन्च होने का साल नहीं था, बल्कि यह डिजिटल दुनिया में एक बड़े बदलाव की शुरुआत भी थी। इसके बाद स्मार्टफोन तेजी से लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनने लगे। सोशल मीडिया, वीडियो प्लेटफॉर्म, चैटिंग ऐप्स और ऑनलाइन मनोरंजन ने लोगों के समय बिताने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया। 

पहले जहां लोग दोस्तों और रिश्तेदारों से आमने-सामने ज्यादा मिलते थे, वहीं अब बातचीत का बड़ा हिस्सा मोबाइल स्क्रीन पर होने लगा। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस बदलाव ने व्यक्तिगत संबंधों और सामाजिक मेलजोल को प्रभावित किया हो सकता है। 

 

युवाओं में सबसे ज्यादा दिखा असर

स्टडी में खास तौर पर किशोरों और युवा वयस्कों पर ध्यान दिया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, 15 से 19 साल और 20 से 24 साल के आयु वर्ग में जन्म दर में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। जिन क्षेत्रों में स्मार्टफोन की पहुंच ज्यादा थी, वहां यह कमी और अधिक स्पष्ट दिखाई दी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि युवा वर्ग स्मार्टफोन का सबसे ज्यादा उपयोग करता है। इसलिए उनके सामाजिक व्यवहार, रिश्तों और जीवनशैली पर तकनीक का प्रभाव भी अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है। 

 

क्या स्मार्टफोन लोगों को एक-दूसरे से दूर कर रहे हैं?

रिसर्च में यह तर्क दिया गया है कि स्मार्टफोन ने लोगों को दुनिया से जोड़ा जरूर है, लेकिन कई मामलों में वास्तविक सामाजिक संपर्क कम भी किया है। लोग पहले की तुलना में ज्यादा समय ऑनलाइन बिता रहे हैं और आमने-सामने मिलने-जुलने का समय कम हो गया है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि जब वास्तविक सामाजिक संपर्क कम होगा तो रिश्ते बनने और आगे बढ़ने की संभावना भी प्रभावित हो सकती है। इसका असर शादी, परिवार और बच्चों की योजना जैसे फैसलों पर पड़ सकता है। 

 

जानकारी तक आसान पहुंच भी हो सकती है वजह

शोधकर्ताओं ने एक और संभावना जताई है। स्मार्टफोन ने लोगों को गर्भनिरोधक उपायों, यौन स्वास्थ्य और परिवार नियोजन से जुड़ी जानकारी तक पहले से कहीं ज्यादा आसान पहुंच दी है। इसका मतलब यह नहीं कि लोग सिर्फ फोन की वजह से कम बच्चे पैदा कर रहे हैं, बल्कि यह कि तकनीक ने लोगों को अधिक जागरूक और योजनाबद्ध फैसले लेने में मदद की हो सकती है। इससे भी जन्म दर पर प्रभाव पड़ सकता है। 

 

सिर्फ अमेरिका नहीं, दुनिया में भी दिखा ट्रेंड

एक अन्य अध्ययन में 128 देशों के आंकड़ों का एनालिसिस किया गया। इसमें पाया गया कि अलग-अलग संस्कृति, धर्म, आर्थिक स्थिति और सरकारी नीतियों वाले देशों में भी लगभग एक ही समय के आसपास जन्म दर में गिरावट शुरू हुई। रिसर्चरों का कहना है कि जब दुनिया के इतने अलग-अलग देशों में एक जैसा पैटर्न दिखाई देता है, तो यह किसी बड़े वैश्विक बदलाव की ओर इशारा करता है। स्मार्टफोन और इंटरनेट क्रांति को उसी बड़े बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है। 

 

क्या iPhone सचमुच ‘बर्थ कंट्रोल डिवाइस’ है?

इस रिसर्च की सबसे ज्यादा चर्चा इसी वजह से हो रही है कि कुछ लोगों ने इसे ‘बर्थ कंट्रोल डिवाइस’ जैसा प्रभाव बताने वाली स्टडी कहा है। हालांकि खुद शोधकर्ताओं ने यह नहीं कहा कि iPhone सीधे तौर पर जन्म दर कम करता है। उनका कहना है कि स्मार्टफोन समाज में आए बड़े बदलावों का एक प्रतीक है। यानी यह कई ऐसे बदलावों से जुड़ा हुआ है जो लोगों की जीवनशैली, रिश्तों और परिवार से जुड़े फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं। 

 

रिसर्च की सीमाएं भी हैं

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि जन्म दर में गिरावट के लिए सिर्फ स्मार्टफोन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। महंगाई, नौकरी की अनिश्चितता, घरों की बढ़ती कीमतें, करियर पर फोकस, देर से शादी और बदलती सामाजिक सोच जैसी कई वजहें भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सिर्फ iPhone आने की वजह से दुनिया में बच्चे कम पैदा हो रहे हैं। रिसर्च केवल एक संभावित संबंध की ओर इशारा करती है, अंतिम निष्कर्ष नहीं देती। 

 

भारत में भी घट रही है जन्म दर

भारत में भी प्रजनन दर लगातार कम हो रही है। हाल के आंकड़ों के अनुसार देश की कुल प्रजनन दर प्रतिस्थापन स्तर 2.1 से नीचे पहुंच चुकी है। यानी औसतन महिलाएं पहले की तुलना में कम बच्चे पैदा कर रही हैं। हालांकि भारत में इसके पीछे शिक्षा, शहरीकरण, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, परिवार नियोजन और आर्थिक कारणों को प्रमुख वजह माना जाता है। 

 

हमारी राय

यह रिसर्च दिलचस्प जरूर है, लेकिन इसे अंतिम सच मान लेना सही नहीं होगा। स्मार्टफोन ने निश्चित रूप से हमारी जिंदगी, रिश्तों और सामाजिक व्यवहार को बदल दिया है, लेकिन जन्म दर में गिरावट जैसे बड़े बदलाव के पीछे कई कारण एक साथ काम करते हैं। iPhone या किसी एक तकनीक को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी। फिर भी यह अध्ययन इस बात की ओर जरूर ध्यान दिलाता है कि तकनीक सिर्फ हमारे काम करने के तरीके ही नहीं, बल्कि समाज और परिवार से जुड़े फैसलों को भी प्रभावित कर सकती है। इसलिए आने वाले समय में इस विषय पर और शोध होने की संभावना है।