क्या आपने कभी किसी के शरीर पर जन्म से ही कोई निशान या तिल देखा है और क्या इसे देखकर कभी आपके मन में यह सवाल आया की आखिर ये कहां से आया?  दरअसल ये निशान बर्थमार्क कहलाते हैं। दुनियाभर में लाखों लोगों के शरीर पर ये निशान होते हैं और ज्यादातर लोग इन्हें अपनी पहचान का हिस्सा मानते हैं। कुछ लोग इसे भाग्य से जोड़ते हैं, तो कुछ सौंदर्य की निशानी समझते हैं। लेकिन असल में ये एक शारीरिक घटना है जिसका चिकित्सा विज्ञान में विस्तृत अध्ययन किया गया है।

 

बर्थमार्क होता क्या है?

 

बर्थमार्क यानी जन्म का निशान, त्वचा पर वो दाग या धब्बा होता है जो बच्चे के जन्म के समय से ही मौजूद रहता है या जन्म के कुछ हफ्तों बाद उभर आता है। ये निशान अलग-अलग रंग, आकार और बनावट के हो सकते हैं कोई लाल होता है, कोई भूरा, कोई काला तो कोई नीला। कुछ बर्थमार्क उम्र के साथ धीरे-धीरे हल्के पड़ जाते हैं, जबकि कुछ ताउम्र बने रहते हैं।

 

चिकित्सकों के मुताबिक ज्यादातर बर्थमार्क पूरी तरह हानिरहित होते हैं और इनमें कोई दर्द भी नहीं होता। लेकिन कुछ खास किस्म के जन्मजात तिल, जिन्हें कंजेनिटल नेवी कहते हैं, आगे चलकर त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसलिए ऐसे निशानों पर नजर रखना जरूरी है।

 

बर्थमार्क कितनी तरह के होते हैं?

 

चिकित्सा विज्ञान में बर्थमार्क को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है:-

 

1. वैस्कुलर बर्थमार्क (रक्त वाहिका संबंधी)

 

ये निशान तब बनते हैं जब त्वचा के नीचे की रक्त वाहिकाएं सही तरह से नहीं बन पातीं या असामान्य रूप से फैल जाती हैं। इनका रंग आमतौर पर लाल, गुलाबी या बैंगनी होता है। इस श्रेणी में तीन मुख्य प्रकार आते हैं:

 

  • स्ट्रॉबेरी हेमांजियोमा: यह लाल रंग का उभरा हुआ निशान होता है जो आमतौर पर जन्म के कुछ हफ्तों बाद दिखाई देता है। यह बच्चे के शुरुआती सालों में बढ़ता है और फिर धीरे-धीरे खुद ही कम होने लगता है।
  • पोर्ट-वाइन स्टेन: यह गहरे लाल या बैंगनी रंग का चपटा निशान होता है। यह उम्र के साथ और गहरा होता जाता है और आमतौर पर खुद नहीं जाता।
  • सैल्मन पैच: यह हल्के गुलाबी रंग का धब्बा होता है जो अक्सर माथे, पलकों या गर्दन के पिछले हिस्से पर दिखता है। बहुत से बच्चों में यह कुछ साल में खुद ठीक हो जाता है।

 

2. पिगमेंटेड बर्थमार्क (रंजकता संबंधी)

 

ये निशान त्वचा में मेलानिन बनाने वाली कोशिकाओं (मेलानोसाइट्स) के किसी एक जगह इकट्ठा हो जाने से बनते हैं। इनका रंग भूरा, काला या नीला हो सकता है।

 

  • मोल्स (तिल): ये सबसे आम पिगमेंटेड बर्थमार्क हैं। आमतौर पर ये गोल और समान रंग के होते हैं। जन्मजात तिल बड़े आकार के हो सकते हैं और इन पर ध्यान देने की जरूरत होती है।
  • कैफे-ऑ-ले स्पॉट्स: हल्के भूरे रंग के ये धब्बे त्वचा पर कहीं भी हो सकते हैं। अगर शरीर पर इनकी संख्या ज्यादा हो तो डॉक्टर से जांच करवाना सही रहता है।
  • मंगोलियन स्पॉट्स: नीले-हरे रंग के ये धब्बे अक्सर एशियाई और अफ्रीकी मूल के बच्चों में पीठ के निचले हिस्से पर दिखते हैं और आमतौर पर कुछ सालों में खुद गायब हो जाते हैं।

 

आखिर क्यों होते हैं बर्थमार्क?

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यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है। डॉक्टरों के मुताबिक बर्थमार्क बनने का कोई एक पक्का कारण अभी तक पूरी तरह समझा नहीं जा सका है। लेकिन कुछ खास वजहें जरूर मानी जाती हैं:-

 

  • रक्त वाहिकाओं का असामान्य विकास: गर्भ में शिशु जब बढ़ रहा होता है तो उस दौरान अगर रक्त नलिकाएं सही तरीके से नहीं बन पातीं तो वैस्कुलर बर्थमार्क हो सकते हैं।
  • मेलानिन कोशिकाओं का जमाव: जब त्वचा को रंग देने वाली कोशिकाएं एक जगह इकट्ठी हो जाती हैं तो पिगमेंटेड निशान बनते हैं।
  • आनुवंशिक कारण: कुछ मामलों में जीन्स में बदलाव या पारिवारिक इतिहास भी बर्थमार्क की वजह बन सकता है। हालांकि ये जरूरी नहीं कि माता-पिता के बर्थमार्क बच्चे को भी हों।
  • खास बीमारियां: कुछ दुर्लभ मेडिकल कंडीशन जैसे न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस में भी शरीर पर एक खास किस्म के निशान बन सकते हैं।

 

कब बन सकता है खतरा?

 

वैसे तो ज्यादातर बर्थमार्क में कोई खतरा नहीं होता, लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर किसी बर्थमार्क में ये बदलाव दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें:

 

  • निशान के रंग, आकार या बनावट में अचानक बदलाव आना
  • खुजली, दर्द या खून आना
  • निशान के किनारे असमान या धुंधले होना
  • निशान का तेजी से बड़ा होना
  • निशान का उभरना, सख्त होना या उस पर घाव जैसा दिखना

 

त्वचा विशेषज्ञ के मुताबिक, जन्मजात बड़े तिलों पर खास ध्यान देना जरूरी है क्योंकि इनमें मेलानोमा यानी त्वचा कैंसर का खतरा हो सकता है। साल में एक बार डर्मेटोलॉजिस्ट से जांच करवाना बेहतर रहता है।

 

इलाज के क्या हैं विकल्प?

 

अगर कोई बर्थमार्क दिखने में परेशानी का कारण बने, शारीरिक कार्य में बाधा डाले या त्वचा कैंसर का खतरा हो, तो उसे हटाने के लिए कई तरीके उपलब्ध हैं:

 

  • लेजर थेरेपी: पोर्ट-वाइन स्टेन जैसे वैस्कुलर बर्थमार्क के लिए यह सबसे कारगर इलाज माना जाता है। लेजर की रोशनी रक्त वाहिकाओं को निशाना बनाकर निशान को हल्का करती है।
  • क्रायोथेरेपी: इसमें बेहद ठंडे तापमान का इस्तेमाल करके असामान्य कोशिकाओं को खत्म किया जाता है।
  • सर्जरी: बड़े या गहरे बर्थमार्क को ऑपरेशन से निकाला जाता है। यह तरीका तब अपनाया जाता है जब दूसरे उपाय काम न करें।
  • स्टेरॉयड इंजेक्शन: कुछ खास बर्थमार्क, खासकर हेमांजियोमा को छोटा करने के लिए कॉर्टिसोन इंजेक्शन दिए जाते हैं।

 

कैसे रखें बर्थमार्क की देखभाल?

 

बर्थमार्क वाली जगह की थोड़ी खास देखभाल करनी चाहिए। धूप की हानिकारक UV किरणों से बचाने के लिए रोजाना सनस्क्रीन लगाएं। निशान को रगड़ें या खरोंचें नहीं। और अगर कोई भी बदलाव नजर आए तो बिना देर किए त्वचा विशेषज्ञ से मिलें।