भारत में कैंसर के मामलों को लेकर हालिया रिपोर्ट्स ने स्वास्थ्य व्यवस्था और समाज दोनों को चिंतित कर दिया है। खासकर ब्रेस्ट कैंसर और ओरल कैंसर के बढ़ते मामलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी Indian Council of Medical Research (ICMR) की स्टडी के मुताबिक, देश में कैंसर का बोझ तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में यह और गंभीर रूप ले सकता है।
कितनी तेजी से बढ़ रहे हैं कैंसर के मामले?
ICMR की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2024 में करीब 15.6 लाख नए कैंसर मामलों का अनुमान लगाया गया है, जो आने वाले वर्षों में बढ़कर 2045 तक 24.6 लाख तक पहुंच सकते हैं। यह आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि कैंसर अब सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब यह बीमारी केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि 30–40 साल की उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर बना सबसे बड़ा खतरा
भारत में महिलाओं के बीच ब्रेस्ट कैंसर सबसे आम कैंसर बन चुका है। ICMR और अन्य अध्ययनों के अनुसार, 2024 में 2.3 लाख से ज्यादा महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले सामने आने की आशंका है, जो इसे देश का सबसे बड़ा महिला कैंसर बनाता है। चिंता की बात यह भी है कि भारत में हर दो महिलाओं में से एक की मौत ब्रेस्ट कैंसर से हो जाती है, जिसका मुख्य कारण देर से पता चलना है। आजकल यह बीमारी कम उम्र की महिलाओं में भी तेजी से बढ़ रही है, जो पहले दुर्लभ माना जाता था।
पुरुषों में ओरल कैंसर का बढ़ता खतरा
अगर पुरुषों की बात करें तो ओरल कैंसर यानी मुंह का कैंसर सबसे आम बन चुका है। भारत में दुनिया के कुल ओरल कैंसर मामलों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। तंबाकू, गुटखा और शराब का सेवन इसके सबसे बड़े कारण माने जाते हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत में होने वाले करीब 80% ओरल कैंसर सीधे तौर पर तंबाकू से जुड़े होते हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं कैंसर के मामले?
ICMR की रिपोर्ट और विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण हैं। आज की बदलती जीवनशैली, गलत खानपान, बढ़ता तनाव, नींद की कमी और शारीरिक गतिविधियों की कमी ने लोगों की सेहत पर गहरा असर डाला है। ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में मोटापा, हार्मोनल बदलाव और देर से मां बनना जैसे कारण भी जिम्मेदार माने जा रहे हैं। वहीं ओरल कैंसर के लिए तंबाकू और अल्कोहल का बढ़ता उपयोग सबसे बड़ा खतरा है।
युवाओं में तेजी से बढ़ रहा खतरा
पहले कैंसर को उम्र से जुड़ी बीमारी माना जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। ICMR के अनुसार, अब युवाओं में भी कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, खासकर ब्रेस्ट और ओरल कैंसर। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि लाइफस्टाइल से जुड़े जोखिम अब कम उम्र में ही असर दिखाने लगे हैं। युवाओं में जागरूकता की कमी और नियमित हेल्थ चेकअप का अभाव भी इस समस्या को बढ़ा रहा है।
देर से पता चलना बन रहा बड़ी समस्या
भारत में कैंसर से होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण है, देर से इलाज। अधिकतर लोग तब तक डॉक्टर के पास नहीं जाते जब तक बीमारी गंभीर स्तर तक नहीं पहुंच जाती। ब्रेस्ट कैंसर के कई मामलों में मरीज तीसरे या चौथे स्टेज पर पहुंचने के बाद इलाज शुरू करते हैं, जिससे ठीक होने की संभावना कम हो जाती है।विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते जांच हो जाए, तो कैंसर का इलाज काफी हद तक संभव है।
जागरूकता की कमी भी बड़ी वजह
भारत में अभी भी कैंसर को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं मौजूद हैं। लोग अक्सर शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं या शर्म और डर के कारण जांच नहीं कराते। ग्रामीण इलाकों में तो स्थिति और भी खराब है, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और जागरूकता की कमी दोनों मौजूद हैं। इस वजह से कई मरीज समय पर इलाज नहीं करवा पाते।
क्या हैं शुरुआती लक्षण?
ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षणों में स्तन में गांठ, त्वचा में बदलाव या दर्द शामिल हो सकते हैं। वहीं ओरल कैंसर में मुंह में घाव, सफेद या लाल धब्बे, निगलने में दिक्कत या लगातार दर्द जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। इन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है, इसलिए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
बचाव और रोकथाम कैसे संभव?
कैंसर से बचाव पूरी तरह संभव नहीं है, लेकिन जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना और तंबाकू व शराब से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही समय-समय पर हेल्थ चेकअप और स्क्रीनिंग कराना भी उतना ही जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और शुरुआती जांच ही कैंसर से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार है।
सरकार और स्वास्थ्य संस्थाओं की पहल
भारत सरकार और ICMR कैंसर से लड़ने के लिए कई योजनाएं चला रहे हैं। देशभर में कैंसर स्क्रीनिंग प्रोग्राम, जागरूकता अभियान और सस्ते इलाज की सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, बढ़ते मामलों को देखते हुए अभी और प्रयासों की जरूरत है।
भविष्य के लिए चेतावनी
ICMR की रिपोर्ट एक तरह से चेतावनी है कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में कैंसर भारत के लिए और बड़ी चुनौती बन सकता है। तेजी से बढ़ते आंकड़े यह दिखाते हैं कि हमें अपने जीवनशैली और स्वास्थ्य के प्रति गंभीर होना होगा।
भारत में ब्रेस्ट और ओरल कैंसर के बढ़ते मामले एक गंभीर चिंता का विषय हैं। ICMR की रिपोर्ट यह साफ करती है कि कैंसर अब हर उम्र और हर वर्ग के लोगों को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में जरूरी है कि लोग जागरूक हों, समय पर जांच कराएं और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। क्योंकि कैंसर से लड़ाई में सबसे बड़ा हथियार है, समय पर पहचान और सही इलाज।









