कई लोगों को ऐसा महसूस होता है कि गले में हमेशा कुछ अटका हुआ है। बार-बार खंखारने का मन करता है, गला साफ करने के बाद भी राहत नहीं मिलती और सुबह उठते ही गले में बलगम जमा महसूस होता है। यह समस्या छोटी लग सकती है, लेकिन अगर लंबे समय तक बनी रहे तो काफी परेशान कर सकती है।
असल में गले में बनने वाला बलगम यानी फेफड़ों और श्वसन तंत्र द्वारा तैयार किया गया एक तरह का म्यूकस होता है। यह शरीर की सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा है और धूल, बैक्टीरिया, वायरस तथा एलर्जी पैदा करने वाले कणों को पकड़कर शरीर को सुरक्षित रखने का काम करता है। समस्या तब शुरू होती है जब इसकी मात्रा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है।
आखिर बलगम होता क्या है?
बलगम एक गाढ़ा और चिपचिपा पदार्थ होता है जो हमारी सांस की नलियों को नम बनाए रखता है। सामान्य स्थिति में शरीर लगातार म्यूकस बनाता रहता है, लेकिन इसकी मात्रा इतनी कम होती है कि हमें इसका एहसास नहीं होता। जब शरीर किसी संक्रमण, एलर्जी या जलन पैदा करने वाले तत्व से लड़ रहा होता है, तब म्यूकस का उत्पादन बढ़ जाता है। यही अतिरिक्त म्यूकस बलगम के रूप में महसूस होने लगता है।
गले में लगातार बलगम बनने की सबसे आम वजहें
गले में बलगम बनने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सबसे आम वजह सर्दी-जुकाम और वायरल संक्रमण है। जब शरीर वायरस से लड़ता है तो म्यूकस ज्यादा बनने लगता है। एलर्जी भी एक बड़ी वजह है। धूल, परागकण, पालतू जानवरों के बाल या प्रदूषण से एलर्जी होने पर शरीर अतिरिक्त म्यूकस बनाता है। इसके अलावा साइनस की समस्या होने पर नाक से निकलने वाला म्यूकस गले में टपकने लगता है, जिसे पोस्ट-नेजल ड्रिप कहा जाता है। इससे भी गले में बलगम जमा होने का एहसास होता है।
एसिडिटी भी हो सकती है वजह
कई लोगों को यह जानकर हैरानी होती है कि पेट की एसिडिटी भी गले में बलगम की वजह बन सकती है। जब पेट का एसिड ऊपर की ओर आता है, जिसे GERD या एसिड रिफ्लक्स कहा जाता है, तब गले में जलन होने लगती है। शरीर इस जलन से बचने के लिए ज्यादा म्यूकस बनाने लगता है। ऐसे लोगों को अक्सर गले में कुछ फंसा हुआ महसूस होता है और बार-बार गला साफ करने की आदत पड़ जाती है।
धूम्रपान और प्रदूषण का असर
सिगरेट पीने वालों और ज्यादा प्रदूषण वाले इलाकों में रहने वाले लोगों में भी यह समस्या आम है। धुआं और प्रदूषित हवा सांस की नलियों में जलन पैदा करती है। इससे शरीर खुद को बचाने के लिए ज्यादा बलगम बनाता है। लंबे समय तक धूम्रपान करने वालों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है क्योंकि उनके श्वसन तंत्र की सफाई करने वाली सूक्ष्म कोशिकाएं कमजोर पड़ने लगती हैं।
बलगम का रंग क्या बताता है?
सामान्य तौर पर म्यूकस साफ या हल्के रंग का होता है। लेकिन संक्रमण होने पर इसका रंग बदल सकता है।सफेद, पीला या हरा बलगम अक्सर संक्रमण या सूजन का संकेत हो सकता है। हालांकि सिर्फ रंग देखकर बीमारी का सही पता नहीं लगाया जा सकता। अगर बलगम में खून दिखाई दे या रंग लंबे समय तक असामान्य बना रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।
घर पर कैसे पा सकते हैं राहत?
अगर समस्या हल्की है तो कुछ आसान उपाय राहत दे सकते हैं। सबसे जरूरी है पर्याप्त पानी पीना। शरीर में पानी की कमी होने पर बलगम और ज्यादा गाढ़ा हो जाता है। गर्म पानी, हर्बल चाय या सूप जैसे गर्म तरल पदार्थ म्यूकस को पतला करने में मदद कर सकते हैं। नमक वाले गुनगुने पानी से गरारे करना भी फायदेमंद माना जाता है। इससे गले की जलन कम हो सकती है और जमा हुआ म्यूकस ढीला पड़ सकता है।
भाप लेने से भी मिल सकती है राहत
भाप लेना बलगम की समस्या में सबसे पुराने और प्रभावी घरेलू उपायों में से एक माना जाता है। गर्म भाप सांस की नलियों को नमी देती है और गाढ़े म्यूकस को पतला करने में मदद कर सकती है। कई एक्सपर्ट्स कमरे में ह्यूमिडिफायर इस्तेमाल करने की भी सलाह देते हैं ताकि हवा में नमी बनी रहे।
कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए?
हर बार बलगम बनना गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन कुछ स्थितियों में डॉक्टर से मिलना जरूरी है। अगर बलगम कई हफ्तों तक बना रहे, लगातार बढ़ता जाए, बहुत गाढ़ा हो जाए, सांस लेने में दिक्कत होने लगे, सीने में दर्द हो, बुखार आए या बलगम में खून दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सा सलाह लेनी चाहिए। ये किसी गंभीर संक्रमण या फेफड़ों से जुड़ी बीमारी के संकेत हो सकते हैं।
क्या बार-बार गला साफ करना सही है?
कई लोग गले में बलगम महसूस होते ही बार-बार खंखारते हैं। इससे कुछ समय के लिए राहत जरूर मिलती है, लेकिन लगातार ऐसा करने से गले में और ज्यादा जलन हो सकती है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि समस्या की जड़ को पहचानना ज्यादा जरूरी है। अगर वजह एलर्जी है तो उसका इलाज होना चाहिए, अगर संक्रमण है तो उसका उपचार होना चाहिए और अगर एसिडिटी कारण है तो उसे नियंत्रित करना चाहिए।
हमारी राय
गले में बलगम बनना शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन जब यह जरूरत से ज्यादा होने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सबसे पहले इसकी वजह को समझना जरूरी है। कई मामलों में पर्याप्त पानी पीना, भाप लेना और एलर्जी से बचाव जैसे आसान उपाय राहत दे सकते हैं। हालांकि अगर समस्या लंबे समय तक बनी रहे या इसके साथ बुखार, सांस लेने में परेशानी या खून जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। सही समय पर कारण की पहचान और इलाज से इस समस्या से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है।









