आज के समय में बहुत से लोगों की सुबह एक ही तरह से शुरू होती है। आंख खुलते ही सबसे पहले हाथ मोबाइल की तरफ जाता है। कोई मैसेज चेक करता है, कोई सोशल मीडिया देखता है तो कोई ईमेल और खबरों में लग जाता है। कई बार तो इंसान बिस्तर से उठने से पहले ही फोन की दुनिया में खो जाता है। लेकिन आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु का कहना है कि सुबह की शुरुआत इस तरह नहीं करनी चाहिए। उनके मुताबिक दिन की पहली कुछ मिनटों की आदत पूरे दिन के मूड और सोच को प्रभावित कर सकती है।
सद्गुरु ने सुबह उठते ही फोन ढूंढने की आदत के बजाय एक छोटी सी लेकिन असरदार आदत अपनाने की बात कही है। उनका कहना है कि इंसान को दिन की शुरुआत बाहर की चीजों से नहीं बल्कि खुद के अंदर से करनी चाहिए। यानी सबसे पहले अपने मन और शरीर के साथ जुड़ना जरूरी है।
सुबह उठते ही फोन देखने की आदत क्यों बढ़ रही है?
आज मोबाइल हमारी जिंदगी का इतना बड़ा हिस्सा बन चुका है कि कई लोगों के लिए सुबह उठते ही फोन देखना एक ऑटोमैटिक आदत बन गई है। अलार्म बंद करने के बाद लोग बिना सोचे नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया और मैसेज देखने लगते हैं।
समस्या यह है कि सुबह का समय मन के लिए काफी संवेदनशील माना जाता है। नींद से जागने के बाद दिमाग धीरे-धीरे एक्टिव होता है। ऐसे में अगर दिन की शुरुआत तुरंत तनाव, खबरों या दूसरों की जिंदगी देखने से होती है तो कई बार इसका असर पूरे दिन के मूड पर पड़ सकता है। कई लोग सुबह उठते ही काम, रिश्तों या सोशल मीडिया से जुड़ी चीजों में उलझ जाते हैं। इससे खुद के लिए शांत समय नहीं मिल पाता।
सद्गुरु ने क्या बताया सुबह की शुरुआत का तरीका?
सद्गुरु के अनुसार सुबह उठते ही सबसे पहले मुस्कुराना चाहिए। उनका मानना है कि जब हम नींद से जागते हैं तो यह अपने आप में एक खास बात है। इसलिए दिन की शुरुआत खुशी और कृतज्ञता के भाव से करनी चाहिए।
उनका कहना है कि मुस्कान किसी बाहरी वजह पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। यानी ऐसा नहीं कि कोई अच्छी खबर मिले तभी हम खुश हों। अगर हम बिना किसी कारण मुस्कुरा सकते हैं तो यह हमारे अंदर की स्थिति को मजबूत बनाता है। यह छोटी सी आदत मन को सकारात्मक दिशा में ले जाने में मदद कर सकती है।
सुबह के पहले कुछ मिनट क्यों होते हैं खास?
सुबह उठने के तुरंत बाद मन ज्यादा शांत अवस्था में होता है। दिनभर की भागदौड़ शुरू नहीं हुई होती और दिमाग पर ज्यादा बोझ नहीं होता। ऐसे समय में अगर हम कुछ पल खुद के साथ बिताते हैं तो दिन ज्यादा संतुलित महसूस हो सकता है।
सद्गुरु का मानना है कि सुबह का पहला अनुभव हमारे पूरे दिन के अनुभव को प्रभावित कर सकता है। अगर शुरुआत जल्दबाजी और तनाव से होगी तो दिन भी उसी तरह महसूस हो सकता है। वहीं अगर शुरुआत जागरूकता और शांति से की जाए तो सोचने का तरीका बेहतर हो सकता है।
फोन की जगह क्या करें?
सुबह उठने के बाद तुरंत फोन उठाने की बजाय कुछ आसान चीजें की जा सकती हैं। सबसे पहले आराम से बैठकर कुछ गहरी सांस लेना, अपने शरीर को महसूस करना या कुछ पल शांत रहना फायदेमंद हो सकता है।
कई लोग सुबह ध्यान, योग या प्राणायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाते हैं। इससे मन को स्थिर करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा सुबह थोड़ी देर धूप लेना, पानी पीना और हल्की एक्सरसाइज भी दिन की अच्छी शुरुआत में मदद कर सकती है।
सद्गुरु की हथेलियां रगड़ने वाली सलाह
सद्गुरु पहले भी सुबह उठने के बाद हथेलियां रगड़ने की बात कर चुके हैं। उनके अनुसार हाथों में बड़ी संख्या में तंत्रिकाओं के सिरे होते हैं और हथेलियां रगड़ने से शरीर को जागने में मदद मिल सकती है। इसके बाद हथेलियों को आंखों पर रखने की परंपरा भी योगिक दृष्टि से बताई गई है। यह एक छोटी सी प्रक्रिया है जो व्यक्ति को अचानक उठने के बजाय धीरे-धीरे दिन के लिए तैयार होने का मौका देती है।
क्या मोबाइल पूरी तरह छोड़ना जरूरी है?
ऐसा नहीं है कि मोबाइल इस्तेमाल करना गलत है। आज के समय में फोन हमारी जरूरत बन चुका है। काम, पढ़ाई और संपर्क के लिए यह जरूरी है। लेकिन समस्या तब होती है जब फोन हमारी सुबह का पहला और सबसे जरूरी हिस्सा बन जाता है। अगर दिन की शुरुआत ही नोटिफिकेशन और स्क्रीन से होगी तो व्यक्ति अपने मन की स्थिति को समझने का मौका खो सकता है। इसलिए कोशिश यह होनी चाहिए कि उठने के बाद कुछ समय खुद के लिए रखा जाए और उसके बाद फोन इस्तेमाल किया जाए।
छोटी आदत बदलकर बड़ा फर्क लाया जा सकता है
किसी भी बदलाव के लिए बड़ी मेहनत की जरूरत नहीं होती। कई बार छोटी-छोटी आदतें ही जीवन में बड़ा असर डालती हैं। सुबह उठते ही फोन देखने की आदत को थोड़ा बदलना भी एक ऐसा कदम हो सकता है। अगर शुरुआत के 10-15 मिनट शांत और सकारात्मक तरीके से बिताए जाएं तो व्यक्ति पूरे दिन ज्यादा फोकस और संतुलन महसूस कर सकता है।
हमारी राय
सुबह की शुरुआत जिस तरह होती है, उसका असर हमारी सोच और पूरे दिन के व्यवहार पर पड़ सकता है। सद्गुरु की सलाह का मूल संदेश यही है कि दिन की शुरुआत बाहरी दुनिया से जुड़ने से पहले खुद से जुड़कर करनी चाहिए। फोन हमारी जिंदगी का हिस्सा है, लेकिन उसे हमारी सुबह का मालिक नहीं बनना चाहिए। अगर उठते ही कुछ पल शांति, मुस्कान और जागरूकता के साथ बिताए जाएं तो यह छोटी सी आदत जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।









