आज के समय में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का एक जरूरी हिस्सा बन चुका है। बड़े लोगों के साथ-साथ बच्चे भी छोटी उम्र से ही मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया से जुड़ रहे हैं। पढ़ाई, ऑनलाइन क्लास, दोस्तों से बातचीत और कई जरूरी कामों के लिए फोन की जरूरत बढ़ गई है। ऐसे में हर माता-पिता के मन में एक सवाल जरूर आता है कि आखिर बच्चे को उसका पहला फोन किस उम्र में देना सही होता है? क्या कम उम्र में फोन देना नुकसानदायक हो सकता है या फिर यह बच्चे के विकास में मदद भी कर सकता है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चे को फोन देने का फैसला सिर्फ उम्र देखकर नहीं लेना चाहिए, बल्कि उसकी समझ, जिम्मेदारी और जरूरत को देखकर लेना चाहिए। हर बच्चा अलग होता है, इसलिए कोई एक तय उम्र सभी बच्चों के लिए सही नहीं हो सकती।
बच्चे को फोन देने से पहले इन बातों पर करें गौर
कई माता-पिता सिर्फ इसलिए बच्चे को फोन दे देते हैं क्योंकि उसके दोस्तों के पास फोन है या बच्चा बार-बार मांग रहा है। लेकिन फोन देने से पहले यह समझना जरूरी है कि बच्चा इसकी जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार है या नहीं।
अगर बच्चा अपने पढ़ाई के काम समय पर करता है, घर के नियमों को समझता है, अपनी चीजों का ध्यान रखता है और सही-गलत में फर्क कर सकता है तो उसे फोन देने के बारे में सोचा जा सकता है। वहीं अगर बच्चा हर समय गेम, वीडियो या स्क्रीन पर रहना चाहता है तो उसे फोन देने से पहले थोड़ा इंतजार करना बेहतर हो सकता है।
सिर्फ उम्र नहीं, बच्चे की समझ है सबसे जरूरी
अक्सर लोग पूछते हैं कि 10 साल, 12 साल या 15 साल की उम्र में फोन देना चाहिए। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ उम्र तय करना सही तरीका नहीं है। कुछ बच्चे कम उम्र में भी जिम्मेदारी समझ लेते हैं, जबकि कुछ बड़े होने के बाद भी फोन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाते।
फोन सिर्फ एक गैजेट नहीं है, बल्कि यह बच्चे को इंटरनेट, सोशल मीडिया और कई तरह की ऑनलाइन चीजों तक पहुंच देता है। इसलिए माता-पिता को यह देखना चाहिए कि बच्चा डिजिटल दुनिया को समझने के लिए कितना तैयार है।
शुरुआत स्मार्टफोन से करना जरूरी नहीं
अगर बच्चे को सिर्फ संपर्क में रहने के लिए फोन चाहिए, तो शुरुआत में साधारण फोन देना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इससे बच्चा कॉल करना और जरूरी समय पर परिवार से जुड़ना सीखता है, लेकिन इंटरनेट और सोशल मीडिया की ज्यादा पहुंच से बचा रहता है। कई एक्सपर्ट्स भी सलाह देते हैं कि अगर बच्चा अभी पूरी तरह तैयार नहीं है तो सीमित सुविधाओं वाला फोन देकर धीरे-धीरे जिम्मेदारी सिखाई जा सकती है।
फोन देने के बाद नियम बनाना जरूरी है
बच्चे को फोन देना सिर्फ फोन खरीदकर हाथ में पकड़ा देने तक सीमित नहीं होना चाहिए। माता-पिता को पहले से कुछ नियम तय करने चाहिए। जैसे फोन कितने घंटे इस्तेमाल करना है, पढ़ाई के समय फोन नहीं चलाना है, रात को फोन अपने पास नहीं रखना है और कौन-कौन से ऐप इस्तेमाल किए जा सकते हैं। अगर शुरुआत से ही नियम तय होंगे तो बच्चे फोन को जरूरत की चीज की तरह इस्तेमाल करना सीखेंगे, आदत या लत की तरह नहीं। एक्सपर्ट्स के अनुसार स्क्रीन टाइम की सीमा तय करना जरूरी है क्योंकि ज्यादा स्क्रीन टाइम नींद, पढ़ाई और सामाजिक व्यवहार पर असर डाल सकता है।
माता-पिता खुद भी बनें उदाहरण
बच्चे वही ज्यादा सीखते हैं जो वह अपने आसपास देखते हैं। अगर माता-पिता खुद हर समय मोबाइल में व्यस्त रहते हैं तो बच्चों से फोन कम इस्तेमाल करने की उम्मीद करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए जरूरी है कि घर में सभी लोग फोन इस्तेमाल को लेकर संतुलन रखें। खाने के समय, परिवार के साथ बैठने के समय और सोने से पहले मोबाइल से दूरी बनाना अच्छी आदत बन सकती है।
सोशल मीडिया के लिए अलग से सोचें
कई बार बच्चे फोन इसलिए मांगते हैं क्योंकि उनके दोस्त सोशल मीडिया इस्तेमाल करते हैं। लेकिन माता-पिता को यह समझना चाहिए कि फोन और सोशल मीडिया दो अलग बातें हैं। फोन की जरूरत हो सकती है, लेकिन सोशल मीडिया की जिम्मेदारी के लिए बच्चे की भावनात्मक समझ और ऑनलाइन व्यवहार को समझना जरूरी है। बच्चों को यह सिखाना चाहिए कि ऑनलाइन किसी से बात करते समय सावधानी रखें, निजी जानकारी शेयर न करें और गलत चीजों से बचें।
पैरेंटल कंट्रोल का कर सकते हैं इस्तेमाल
आजकल मोबाइल में कई ऐसे फीचर्स मौजूद हैं जिनकी मदद से माता-पिता बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों को सुरक्षित बना सकते हैं। ऐप लिमिट, स्क्रीन टाइम कंट्रोल और कंटेंट फिल्टर जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि यह जरूरी है कि बच्चे को यह महसूस न हो कि उसकी जासूसी की जा रही है। उसे समझाना चाहिए कि ये नियम उसकी सुरक्षा के लिए हैं।
फोन के फायदे भी हैं
अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो मोबाइल बच्चों के लिए फायदेमंद भी हो सकता है। ऑनलाइन पढ़ाई, नई चीजें सीखना, जानकारी हासिल करना और तकनीक को समझना आज के समय में जरूरी है। फोन बच्चे को आत्मनिर्भर बनाना भी सिखा सकता है, जैसे जरूरी जानकारी ढूंढना, समय मैनेज करना और डिजिटल दुनिया को समझना। लेकिन फायदा तभी होगा जब फोन का इस्तेमाल संतुलित तरीके से किया जाए।
फोन की वजह से आने वाली परेशानियां
कम उम्र में बिना निगरानी के फोन इस्तेमाल करने से कई समस्याएं हो सकती हैं। बच्चा ज्यादा समय स्क्रीन पर बिताने लग सकता है, पढ़ाई में ध्यान कम हो सकता है या ऑनलाइन गलत चीजों के संपर्क में आ सकता है।इसके अलावा फोन की आदत बच्चों के व्यवहार और नींद को भी प्रभावित कर सकती है। इसलिए फोन देने के बाद भी माता-पिता की भूमिका खत्म नहीं होती बल्कि और बढ़ जाती है।
हमारी राय
बच्चे को पहला फोन देने का फैसला जल्दबाजी में नहीं लेना चाहिए। सही समय वही है जब बच्चा फोन की जिम्मेदारी समझने लगे और उसका इस्तेमाल सही तरीके से कर सके। फोन आज की जरूरत है, लेकिन इसे बच्चे की उम्र, समझ और जरूरत के हिसाब से देना चाहिए। अगर माता-पिता नियमों और भरोसे के साथ बच्चे को फोन इस्तेमाल करना सिखाते हैं तो यह उसके लिए नुकसान नहीं बल्कि सीखने का अच्छा माध्यम बन सकता है।









