भारत की पहचान सिर्फ यहां की संस्कृति, त्योहार और परंपराओं से ही नहीं बल्कि खाने के स्वाद से भी होती है। भारतीय खाना दुनियाभर में अपनी अलग पहचान बना चुका है। मसालों की खुशबू, अलग-अलग राज्यों की परंपराएं और अनोखे स्वाद ने भारतीय व्यंजनों को विदेशों तक पहुंचा दिया है। आज कई ऐसे भारतीय फूड हैं जो सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में पसंद किए जाते हैं। 

कई भारतीय व्यंजन जब दूसरे देशों तक पहुंचे तो वहां के लोगों ने उन्हें अपने स्वाद और उपलब्ध चीजों के हिसाब से थोड़ा बदल लिया। यही वजह है कि कुछ डिश अब नए नाम और नए अंदाज के साथ दुनिया भर में मशहूर हो चुकी हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ भारतीय फूड्स के बारे में जिन्होंने देश की सीमाएं पार करके इंटरनेशनल पहचान बनाई।

 

इडली का स्वाद म्यांमार तक पहुंचा  

दक्षिण भारत की सबसे पसंदीदा डिश इडली आज दुनियाभर में खाई जाती है। चावल और उड़द दाल से बनने वाली यह हल्की और स्वादिष्ट डिश अपने आसान पाचन और स्वाद की वजह से काफी लोकप्रिय हुई।भारत से बाहर खासकर म्यांमार में इडली ने एक अलग रूप लिया। वहां इसे स्थानीय स्वाद के साथ खाया जाने लगा। कुछ जगहों पर इडली को नारियल वाली करी और अलग तरह के मसालों के साथ परोसा जाता है। भारतीय इडली ने वहां के खान-पान में अपनी अलग जगह बना ली है। 

 

मथुरा का पेड़ा बना गयाना का पीरा

भारत की मिठाइयों की बात हो और पेड़े का नाम न आए ऐसा हो नहीं सकता। खासकर मथुरा के पेड़े अपनी पहचान रखते हैं। लेकिन जब भारतीय लोग दूसरे देशों में गए तो उनके साथ उनके खाने की परंपराएं भी गईं।गयाना में भारतीय मजदूरों के साथ पेड़े की रेसिपी पहुंची। वहां दूध और कुछ सामग्री की उपलब्धता अलग थी, इसलिए इस मिठाई में बदलाव आए और यह ‘पीरा’ के नाम से पहचानी जाने लगी। भारतीय मिठाई ने वहां के स्वाद के साथ नया रूप ले लिया।

 

छोले भटूरे से प्रेरित हुआ कैरेबियन का डबल्स

छोले भटूरे भारत की सबसे पसंदीदा स्ट्रीट फूड डिश में से एक है। इसी तरह की भारतीय डिश से प्रेरित होकर त्रिनिदाद और टोबैगो में ‘डबल्स’ नाम की डिश लोकप्रिय हुई। इसमें छोले जैसे मसालेदार चने को एक खास तरह की ब्रेड के साथ परोसा जाता है। समय के साथ इसमें वहां के स्थानीय मसाले और सॉस भी जुड़ गए। आज डबल्स वहां का एक मशहूर स्ट्रीट फूड बन चुका है। 

 

रोटी और करी से बना साउथ अफ्रीका का बन्नी चाउ

साउथ अफ्रीका की मशहूर डिश ‘बन्नी चाउ’ का कनेक्शन भारतीय खाने से जुड़ा हुआ है। इस डिश में ब्रेड के अंदर करी भरी जाती है। कहा जाता है कि भारतीय मूल के लोगों ने वहां रोटी और करी की परंपरा को स्थानीय तरीके से अपनाया और धीरे-धीरे यह डिश लोकप्रिय हो गई। आज बन्नी चाउ साउथ अफ्रीका के पसंदीदा स्ट्रीट फूड्स में शामिल है। 

 

पराठे से बना मलेशिया का रोटी कनाई

दक्षिण भारत के परोट्टा से जुड़ी डिश मलेशिया, इंडोनेशिया और सिंगापुर तक पहुंची और वहां इसे अलग नाम मिला। मलेशिया में इसे रोटी कनाई कहा जाता है। इसकी खासियत है इसकी परतदार बनावट और कुरकुरापन। वहां इसे अलग-अलग करी और सॉस के साथ खाया जाता है। भारतीय पराठे ने विदेश में जाकर एक नया अंदाज अपना लिया। 

 

बिहार-यूपी की दाल पूरी से मॉरीशस का धोल पूरी

बिहार और उत्तर प्रदेश की दाल पूरी की पहचान अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। मॉरीशस में यही डिश ‘धोल पूरी’ के नाम से काफी लोकप्रिय है। भारतीय प्रवासियों के साथ यह रेसिपी वहां पहुंची और स्थानीय स्वाद के हिसाब से इसमें बदलाव हुए। आज धोल पूरी मॉरीशस के सबसे पसंदीदा स्ट्रीट फूड्स में गिनी जाती है। 

 

खाजा से बना रियूनियन का बोनबोन क्रावात

भारत की पारंपरिक मिठाई खाजा भी विदेशों तक पहुंची। फ्रांस के नियंत्रण वाले रियूनियन द्वीप पर इसका अलग रूप देखने को मिलता है। वहां स्थानीय चीजों को मिलाकर इस मिठाई को नया स्वाद दिया गया और यह ‘बोनबोन क्रावात’ के नाम से पहचानी जाने लगी। 

 

पकौड़े से प्रेरित फिजी का गुलगुला

भारत में बारिश के मौसम में पकौड़े खाने का अलग ही मजा है। इसी तरह भारतीय प्रवासियों के साथ पकौड़े जैसी डिश फिजी पहुंची और वहां इसका नया रूप सामने आया। फिजी का गुलगुला आटे, गुड़ और केले जैसी चीजों से बनाया जाता है। इसमें स्थानीय स्वाद भी शामिल हो गया और यह वहां की लोकप्रिय मिठाई बन गई। 

 

खीर का रूसी कनेक्शन

भारत की पारंपरिक खीर भी विदेशों तक पहुंची। रूस के कुछ हिस्सों में भारतीय व्यापारियों के जरिए खीर की परंपरा पहुंची और वहां इसे स्थानीय चावल और स्वाद के हिसाब से बनाया जाने लगा। दूध और चावल से बनने वाली यह मिठाई अब एक अलग अंदाज में वहां भी पसंद की जाती है। 'कशा' (Kasha) नाम की मीठी दलिया या चावल की डिश बनाई जाती है। 

 

खिचड़ी से बना ब्रिटेन का केडगेरी

भारत की साधारण और आरामदायक डिश खिचड़ी ने भी विदेश में अपनी पहचान बनाई। ब्रिटेन में इसका एक अलग रूप ‘केडगेरी’ के नाम से लोकप्रिय हुआ। इसमें चावल, मसाले, अंडे और मछली जैसी चीजों को शामिल किया गया और यह ब्रिटिश खाने का हिस्सा बन गया। 

 

भारतीय खाने की सबसे बड़ी ताकत है इसका बदलना

भारतीय खाना इसलिए भी खास है क्योंकि यह हर जगह जाकर वहां की संस्कृति के साथ घुल-मिल जाता है। यही वजह है कि एक ही डिश अलग-अलग देशों में अलग स्वाद और नाम के साथ मिलती है। दाल, चावल, मसाले, मिठाइयां और स्ट्रीट फूड। इन सबने दुनिया को भारतीय खाने की विविधता दिखाई है। 

 

हमारी राय

भारतीय व्यंजनों का विदेशों में लोकप्रिय होना सिर्फ खाने की सफलता नहीं बल्कि हमारी संस्कृति की पहचान भी है। सबसे खास बात यह है कि भारतीय खाना जहां भी पहुंचा, उसने वहां के स्वाद को अपनाया और फिर भी अपनी जड़ों को बनाए रखा।

आज जब दुनिया भर के लोग भारतीय मसालों और पारंपरिक व्यंजनों को पसंद कर रहे हैं, तो यह दिखाता है कि भारत का खाना सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं बल्कि एक अनुभव है। इडली से लेकर खीर तक, हर डिश अपने साथ एक कहानी लेकर चलती है और यही भारतीय खाने की सबसे बड़ी खूबसूरती है।