देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG एक बार फिर विवादों में है। पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और दोबारा एग्जाम कराने की घोषणा के बाद लाखों छात्र और अभिभावक परेशान हैं। इसी बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या अब NEET परीक्षा National Testing Agency यानी NTA से लेकर किसी दूसरी एजेंसी को दी जाएगी? इस मुद्दे पर अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ा बयान दिया है। 

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने साफ कहा है कि फिलहाल NEET कराने की जिम्मेदारी NTA के पास ही रहेगी और एजेंसी को बदला नहीं जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत है और NTA को पहले से ज्यादा मजबूत बनाया जाएगा।

 

आखिर क्यों उठ रही है NTA को हटाने की मांग?

पिछले कुछ वर्षों में NTA लगातार विवादों में रही है। कभी पेपर लीक के आरोप लगे तो कभी परीक्षा केंद्रों पर गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं। खासकर NEET 2024 और अब NEET 2026 विवाद के बाद छात्रों और विपक्षी दलों ने एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

इस बार मामला इसलिए ज्यादा गंभीर हो गया क्योंकि कई राज्यों में “गेस पेपर” और असली प्रश्नपत्र के सवालों में समानता मिलने के दावे किए गए। राजस्थान SOG की जांच में 100 से ज्यादा सवाल मिलते-जुलते पाए जाने की खबर सामने आई। इसके बाद देशभर में विरोध शुरू हो गया और सोशल मीडिया पर #RemoveNTA ट्रेंड करने लगा।

 

शिक्षा मंत्री ने क्या कहा?

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि NTA हर साल 1 करोड़ से ज्यादा छात्रों की परीक्षाएं आयोजित करती है और ज्यादातर परीक्षाएं सफलतापूर्वक संपन्न होती हैं। इसलिए सिर्फ एक विवाद के आधार पर पूरी एजेंसी को बदलना सही नहीं माना जा सकता। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि परीक्षा प्रणाली में कुछ कमजोरियां सामने आई हैं और उन्हें दूर करने के लिए बड़े सुधार किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि छात्रों का भरोसा बनाए रखना सबसे जरूरी है।

 

क्या अब ऑनलाइन होगा NEET?

NEET विवाद के बाद सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। शिक्षा मंत्री ने घोषणा की है कि आने वाले समय में NEET को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी CBT मोड में कराने की तैयारी की जा रही है। सरकार का मानना है कि ऑनलाइन परीक्षा होने से पेपर लीक की संभावना कम हो सकती है। अभी तक NEET ऑफलाइन OMR शीट आधारित परीक्षा के रूप में आयोजित होती रही है।

हालांकि इस बदलाव को लेकर छात्रों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे बेहतर कदम बता रहे हैं, जबकि कई छात्रों को डर है कि ग्रामीण इलाकों में कंप्यूटर आधारित परीक्षा चुनौती बन सकती है।

 

NTA आखिर है क्या?

National Testing Agency की स्थापना 2017 में की गई थी। इसका उद्देश्य देशभर की बड़ी प्रवेश परीक्षाओं को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से कराना था। NTA फिलहाल NEET, JEE Main, UGC-NET और कई दूसरी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं आयोजित करती है। पहले NEET परीक्षा CBSE कराता था, लेकिन 2019 से इसकी जिम्मेदारी NTA को दे दी गई। सरकार का मानना था कि एक विशेष एजेंसी होने से परीक्षा प्रणाली ज्यादा पेशेवर और पारदर्शी बनेगी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एजेंसी लगातार आलोचना झेल रही है।

 

छात्रों में क्यों बढ़ रहा गुस्सा?

NEET जैसी परीक्षा के लिए छात्र कई-कई साल तैयारी करते हैं। लाखों परिवार कोचिंग और पढ़ाई पर भारी खर्च करते हैं। ऐसे में जब पेपर लीक या परीक्षा रद्द होने जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तो छात्रों का मानसिक दबाव काफी बढ़ जाता है।

कई छात्रों ने कहा कि उन्हें फिर से तैयारी शुरू करनी पड़ रही है। कुछ छात्रों की छुट्टियां, काउंसलिंग और भविष्य की योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार होने वाले विवाद छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमजोर कर रहे हैं।

 

सरकार अब क्या करने जा रही है?

सरकार ने संकेत दिए हैं कि सिर्फ NTA को बनाए रखना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पूरे परीक्षा ढांचे में बदलाव करना पड़ेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक पेपर सेटिंग, ट्रांसपोर्टेशन, एग्जाम सेंटर मॉनिटरिंग और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है।

इसके अलावा AI आधारित निगरानी सिस्टम और एन्क्रिप्टेड डिजिटल पेपर सिस्टम जैसे विकल्पों पर भी चर्चा हो रही है। CBI जांच भी शुरू की गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पेपर लीक नेटवर्क कहां तक फैला हुआ था। 

 

विपक्ष क्यों बना रहा है मुद्दा?

विपक्षी दल लगातार सरकार को घेर रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार गड़बड़ियां सामने आ रही हैं और सरकार जवाबदेही तय करने में विफल रही है। कई नेताओं ने NTA को भंग करने तक की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में छात्र एजेंसी को बदलने की मांग कर रहे हैं। हालांकि सरकार फिलहाल सुधार के रास्ते पर चलती दिख रही है, न कि एजेंसी बदलने के।

 

क्या सिर्फ एजेंसी बदलने से समस्या हल हो जाएगी?

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ एजेंसी बदल देना समाधान नहीं माना जा सकता। असली जरूरत पूरे परीक्षा सिस्टम को मजबूत बनाने की है। अगर पेपर प्रिंटिंग, सेंटर मैनेजमेंट और सुरक्षा तंत्र में कमजोरियां बनी रहेंगी, तो नई एजेंसी के सामने भी वही समस्याएं आ सकती हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि तकनीक आधारित निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

 

दोबारा परीक्षा से बढ़ी परेशानी

NEET 2026 दोबारा कराने की घोषणा के बाद लाखों छात्रों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। NTA ने 21 जून को री-एग्जाम कराने का फैसला लिया है। कई छात्र कह रहे हैं कि उन्हें फिर से मानसिक दबाव से गुजरना पड़ रहा है। खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह स्थिति और कठिन मानी जा रही है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि साइबर कैफे के जरिए फॉर्म भरने वाले छात्रों को फीस रिफंड में दिक्कत हो सकती है।

 

आने वाले समय में क्या बदल सकता है?

विशेषज्ञ मानते हैं कि NEET विवाद के बाद भारत की परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सरकार अब डिजिटल और कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं की तरफ तेजी से बढ़ती दिख रही है। इसके साथ ही परीक्षा सुरक्षा, डेटा एन्क्रिप्शन और निगरानी को लेकर भी सख्ती बढ़ सकती है।

फिलहाल इतना साफ है कि सरकार NTA को हटाने के मूड में नहीं है, लेकिन एजेंसी पर अब पहले से कहीं ज्यादा दबाव रहेगा। आने वाले महीनों में यह तय होगा कि सुधारों के जरिए छात्रों का भरोसा दोबारा जीता जा सकता है या नहीं।